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महंगाई भत्ते पर बड़ा फैसला: कर्मियों और पेंशनभोगियों में भेदभाव नहीं कर सकते राज्य – सुप्रीम कोर्ट
 

 
 महंगाई भत्ते पर बड़ा फैसला: कर्मियों और पेंशनभोगियों में भेदभाव नहीं कर सकते राज्य – सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि महंगाई भत्ते (DA) को लेकर राज्य सरकारें सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव नहीं कर सकतीं। अदालत ने कहा कि महंगाई का असर दोनों वर्गों पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए लाभ भी बराबर मिलना चाहिए।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने केरल राज्य और केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की अपीलों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है और किसी भी तरह की मनमानी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। फैसले में यह भी कहा गया कि “समानता और मनमानी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हैं।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी वर्गीकरण को वैध ठहराने के लिए दो शर्तें जरूरी हैं—पहली, वर्गीकरण स्पष्ट और तार्किक अंतर पर आधारित हो, और दूसरी, उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो।

बंगाल मतदाता सूची विवाद पर 13 अप्रैल को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची फ्रीज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 13 अप्रैल को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। चुनाव आयोग ने पहले चरण की सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदाता सूची अंतिम रूप दे दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई अपीलें अभी भी लंबित हैं, ऐसे में सूची फ्रीज करना उचित नहीं है।

25 PIL दाखिल करने वाले वकील को कोर्ट की नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मुद्दों पर 25 जनहित याचिकाएं दायर करने वाले एक अधिवक्ता को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सीधे अदालत आने के बजाय पहले संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए। अदालत ने सलाह दी कि वकील को अपने पेशे पर ध्यान देना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

जाति जनगणना पर याचिका खारिज, भाषा पर सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका में इस्तेमाल की गई “अशोभनीय और आपत्तिजनक भाषा” पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय में दायर दस्तावेजों में मर्यादा और शालीनता अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को जाति जनगणना रोकने और एक बच्चे वाले परिवारों को प्रोत्साहन देने की नीति बनाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने किसी भी निर्देश देने से इनकार कर दिया।

2027 की जनगणना से जुड़ी याचिका भी खारिज

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट 2027 की जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर चुका है। 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी और इसे पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने की योजना है।