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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: पुणे-पिंपरी में BJP की लहर, अजित पवार को करारा झटका

 
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: पुणे-पिंपरी में BJP की लहर, अजित पवार को करारा झटका
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Mumbai/Pune : महाराष्ट्र के महानगरपालिका चुनावों में मुंबई से लेकर पश्चिम महाराष्ट्र तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्पष्ट बढ़त देखने को मिली है। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को इन चुनावों में मजबूती मिली है, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को करारा झटका लगा है। खासतौर पर पुणे और पिंपरी-चिंचवड जैसे उनके गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

पुणे में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, एनसीपी कमजोर

पुणे महानगरपालिका चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि अजित पवार की एनसीपी का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। चुनाव से पहले अजित पवार की पार्टी ने महायुति से अलग होकर मुंबई में अकेले चुनाव लड़ा था, जबकि पुणे और पिंपरी-चिंचवड में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) से हाथ मिलाया था। इसके बावजूद दोनों ही जगहों पर भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई। शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने भी पुणे और पिंपरी-चिंचवड में जोरदार चुनाव प्रचार किया था, लेकिन इसका चुनावी परिणामों पर कोई खास असर नहीं दिखा।

पिंपरी-चिंचवड में अजित पवार की रणनीति विफल

एशिया की सबसे अमीर मानी जाने वाली पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका में अजित पवार ने सबसे अधिक जोर लगाया था। उन्होंने प्रचार के दौरान भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे, लेकिन उनकी पार्टी 40 से कम सीटों पर सिमट गई। भाजपा की मजबूत चुनावी रणनीति के आगे अजित पवार टिक नहीं सके।

पिंपरी-चिंचवड और पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी और केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भाजपा की कमान संभाली थी। चुनाव के दौरान अजित पवार और मोहोल के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली थी। पुणे में हार अजित पवार के लिए इसलिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि वह इस क्षेत्र के प्रभारी मंत्री हैं।

मुंबई में नवाब मलिक का दांव उलटा पड़ा

मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में अजित पवार ने पार्टी की कमान नवाब मलिक को सौंपी थी। इस फैसले को लेकर भाजपा के साथ उनके रिश्तों में भी तनाव बढ़ा था। अजित पवार की पार्टी ने मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन यह रणनीति उलटी पड़ गई। नवाब मलिक की अगुवाई में एनसीपी ने 30 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पार्टी महज कुछ सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। यहां तक कि नवाब मलिक के भाई भी चुनाव हार गए।

पवार परिवार का गढ़ भी नहीं बचा

पश्चिम महाराष्ट्र में बारामती को पवार परिवार का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, जिसका प्रभाव पुणे और पिंपरी-चिंचवड तक फैला हुआ है। पहले इन दोनों महानगरपालिकाओं पर एनसीपी का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार भाजपा ने यहां पूरी तरह से बाजी पलट दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों ने पश्चिम महाराष्ट्र में भाजपा की जमीनी पकड़ को और मजबूत किया है, जबकि अजित पवार की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।