महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव: अंबरनाथ में बड़ा सियासी उलटफेर, कांग्रेस के 12 पार्षद बीजेपी में शामिल
अंबरनाथ महानगरपालिका में बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन विवाद के बाद कांग्रेस ने 12 पार्षद निलंबित किए, जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। इससे नगर निगम कांग्रेस-मुक्त हो गई और शिंदे गुट की शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई। पूरे घटनाक्रम का सीधा लाभ बीजेपी को मिला।
Mumbai : महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव के तहत अंबरनाथ में सियासी समीकरणों ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। यहां पर पारंपरिक रूप से एक-दूसरे की विरोधी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच हुए गठबंधन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। हालांकि, इस फैसले पर कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया। इसके बाद घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि निलंबित सभी पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए।
कांग्रेस हुई ‘कांग्रेस मुक्त’, बीजेपी को मिला सीधा फायदा
कांग्रेस से निलंबित पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद अंबरनाथ महानगरपालिका अब पूरी तरह कांग्रेस मुक्त हो गई है। इस राजनीतिक घटनाक्रम से कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है, जबकि बीजेपी को स्पष्ट रूप से फायदा मिलता नजर आ रहा है। इसके साथ ही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना भी अंबरनाथ महानगरपालिका की सत्ता से बाहर हो गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी जताई थी नाराजगी
बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए इस अप्रत्याशित गठबंधन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी। मुख्यमंत्री की आपत्ति के बाद यह गठबंधन टूट गया। वहीं, कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया था।
शिंदे गुट को झटका, बीजेपी की रणनीति सफल
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की रणनीति अंबरनाथ में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से दूर करने की थी। इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना जहां महानगरपालिका से बाहर हो गई, वहीं कांग्रेस भी अपना अस्तित्व खो बैठी। इस तरह पूरा सियासी लाभ बीजेपी के खाते में जाता दिख रहा है।
कांग्रेस का दावा—बीजेपी ने दिया था गठबंधन का प्रस्ताव
अंबरनाथ कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया है कि गठबंधन का प्रस्ताव सबसे पहले बीजेपी की ओर से आया था। हालांकि, इस फैसले के दौरान कांग्रेस के राज्य कार्यालय और शीर्ष नेतृत्व को विश्वास में नहीं लिया गया, जिसके चलते आलाकमान ने कड़ी कार्रवाई की। वर्तमान स्थिति में कांग्रेस के निलंबित पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी की स्थानीय पकड़ और कमजोर होती नजर आ रही है।
अंबरनाथ का यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सियासत में आगामी चुनावों से पहले दल-बदल और गठबंधनों की नई तस्वीर पेश करता है।
