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Make in India के 12 साल: अब सिर्फ मोबाइल नहीं, फोन के अंदर लगने वाले पार्ट्स भी बनाएगा भारत

Make in India के 12 साल पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अगली दिशा बताई। अब फोकस सिर्फ मोबाइल असेंबल करने पर नहीं, बल्कि कैमरा, डिस्प्ले, बैटरी सेल, सिंथेटिक ग्रेफाइट और दूसरे कंपोनेंट्स व मटेरियल के घरेलू उत्पादन पर है।
 
Make in India के 12 साल
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Make in India: भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग अब सिर्फ तैयार फोन को असेंबल करने तक सीमित नहीं रहने वाली है। Make in India पहल के 12 साल पूरे होने पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत अब स्मार्टफोन के अंदर इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स और मटेरियल का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यानी अगला फोकस फोन बनाने के साथ-साथ उसकी सप्लाई चेन को देश के भीतर मजबूत करने पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में Make in India पहल की शुरुआत की थी। 12 साल बाद सरकार के मुताबिक, भारत दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है और देश में हर साल करीब 33 करोड़ मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं।

अब फोन के अंदर लगने वाले पार्ट्स पर फोकस

अश्विनी वैष्णव ने 25 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत पहले से फोन बना रहा है, अब वह उसके अंदर जाने वाली चीजों का निर्माण भी बढ़ा रहा है। एक स्मार्टफोन में सैकड़ों अलग-अलग कंपोनेंट्स और मटेरियल का इस्तेमाल होता है। सरकार अब इसी सप्लाई चेन के अगले स्तर पर घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

इसमें कैमरा, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, स्पीकर, कॉइल, PCB और कनेक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के साथ-साथ बैटरी से जुड़े मटेरियल भी शामिल हैं।

बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में भी बढ़ रहा है घरेलू उत्पादन

वैष्णव ने खास तौर पर स्मार्टफोन बैटरी की सप्लाई चेन का जिक्र किया। उनके मुताबिक, भारत में अब मोबाइल फोन के लिए बैटरी सेल का निर्माण हो रहा है और अगला कदम उन मटेरियल के उत्पादन की ओर है, जिनसे ये सेल तैयार होते हैं।

इनमें सिंथेटिक ग्रेफाइट भी शामिल है। इसका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी के एनोड में होता है। इसके अलावा बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट के कुछ एडिटिव्स और एसीटिलीन ब्लैक जैसे मटेरियल के घरेलू उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है।

भारत में बन रहे 33 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। देश में हर साल करीब 330 मिलियन यानी 33 करोड़ मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन में 99.2 फीसदी फोन देश में ही बने थे। एक दशक पहले यह आंकड़ा करीब 26 फीसदी था।

सरकार के अनुसार मोबाइल फोन उत्पादन में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2014-15 में करीब 18,000 करोड़ रुपये का मोबाइल उत्पादन हुआ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर करीब 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया।

Make in India का अगला चरण क्या है?

सरकार की रणनीति अब केवल ज्यादा मोबाइल फोन बनाने की नहीं, बल्कि घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने की है। यानी फोन के ज्यादा से ज्यादा हिस्से और उसमें इस्तेमाल होने वाले मटेरियल भारत में ही तैयार किए जाएं।

इसी दिशा में केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में 62,500 करोड़ रुपये के Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को अधिसूचित किया था। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए है। इसका उद्देश्य मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन को गहरा करना, घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना और भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को बढ़ावा देना है।

मोबाइल उत्पादन के साथ भारतीय ब्रांड पर भी जोर

नई योजना में सिर्फ बड़ी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को ही प्रोत्साहन देने की बात नहीं है, बल्कि भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को भी समर्थन देने का प्रावधान है।

सरकार के मुताबिक योजना के तहत भारतीय ब्रांड्स को प्रोत्साहन के साथ डिजाइन और रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए भी अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जा सकता है। घरेलू स्तर पर प्रमुख कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की सोर्सिंग को भी अतिरिक्त प्रोत्साहन से जोड़ा गया है।

अगले पांच साल में 39 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि Mobile Phone Manufacturing Scheme की पांच साल की अवधि में देश में करीब 39 लाख करोड़ रुपये का संचयी मोबाइल फोन उत्पादन हो सकता है। योजना से करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद भी जताई गई है।

इस तरह Make in India के अगले चरण में भारत का लक्ष्य सिर्फ मोबाइल फोन का बड़ा निर्माता बने रहना नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद कंपोनेंट, मटेरियल और डिजाइन की पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करना है।