बंगाल की लाइब्रेरी से हटाई जाएंगी ममता बनर्जी की किताबें! CM शुभेंदु के मंत्री का बड़ा बयान, बोले- ज्ञान नहीं...
Updated: Jun 12, 2026, 19:05 IST
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सरकारी सहायता प्राप्त पुस्तकालयों में रखी जाने वाली पुस्तकों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राज्य के पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने स्पष्ट किया है कि अब लाइब्रेरियों में केवल ऐसी किताबों को स्थान दिया जाएगा, जो पाठकों के ज्ञानवर्धन और राष्ट्रीय चेतना के विकास में सहायक हों।
मंत्री के इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कुछ रचनाओं और कविताओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर उनकी चर्चित कविता 'एपांग ओपांग झपांग' का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और साहित्यिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
ज्ञान बढ़ाने वाली किताबों को मिलेगी प्राथमिकता
मीडिया से बातचीत में गौरीशंकर घोष ने कहा कि लोग पुस्तकालयों में ज्ञान अर्जित करने के उद्देश्य से जाते हैं। ऐसे में वहां ऐसी किताबें उपलब्ध होनी चाहिए, जो पाठकों के बौद्धिक विकास में मदद करें और विशेष रूप से बच्चों को सकारात्मक दिशा प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि जिन पुस्तकों से पाठकों के ज्ञान, व्यक्तित्व और सोच के विकास में कोई विशेष योगदान नहीं मिलता, उन्हें पुस्तकालयों में रखने का औचित्य नहीं है। मंत्री ने संकेत दिया कि 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी पुस्तकों को भी समीक्षा के बाद हटाया जा सकता है।
महान साहित्यकारों और ऐतिहासिक विभूतियों की रचनाओं को मिलेगा स्थान
जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी पुस्तकों को भी लाइब्रेरियों से हटाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि प्राथमिकता उन पुस्तकों को दी जाएगी जो बच्चों और युवाओं के मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक हों।
मंत्री ने बताया कि पुस्तकालयों में भविष्य में महान साहित्यकारों और प्रेरणादायक ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़ी पुस्तकों को अधिक स्थान दिया जाएगा। इनमें Rabindranath Tagore, Kazi Nazrul Islam और Swami Vivekananda की रचनाओं के साथ-साथ Chhatrapati Shivaji Maharaj और Maharana Pratap जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की जीवनियां शामिल होंगी।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
पुस्तकालयों में पुस्तकों के चयन को लेकर राज्य सरकार के इस फैसले ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इसे साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सरकार का दावा है कि यह कदम पुस्तकालयों की गुणवत्ता और पाठकों के बौद्धिक विकास को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।
मंत्री के इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कुछ रचनाओं और कविताओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर उनकी चर्चित कविता 'एपांग ओपांग झपांग' का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और साहित्यिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
ज्ञान बढ़ाने वाली किताबों को मिलेगी प्राथमिकता
मीडिया से बातचीत में गौरीशंकर घोष ने कहा कि लोग पुस्तकालयों में ज्ञान अर्जित करने के उद्देश्य से जाते हैं। ऐसे में वहां ऐसी किताबें उपलब्ध होनी चाहिए, जो पाठकों के बौद्धिक विकास में मदद करें और विशेष रूप से बच्चों को सकारात्मक दिशा प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि जिन पुस्तकों से पाठकों के ज्ञान, व्यक्तित्व और सोच के विकास में कोई विशेष योगदान नहीं मिलता, उन्हें पुस्तकालयों में रखने का औचित्य नहीं है। मंत्री ने संकेत दिया कि 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी पुस्तकों को भी समीक्षा के बाद हटाया जा सकता है।
महान साहित्यकारों और ऐतिहासिक विभूतियों की रचनाओं को मिलेगा स्थान
जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी पुस्तकों को भी लाइब्रेरियों से हटाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि प्राथमिकता उन पुस्तकों को दी जाएगी जो बच्चों और युवाओं के मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक हों।
मंत्री ने बताया कि पुस्तकालयों में भविष्य में महान साहित्यकारों और प्रेरणादायक ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़ी पुस्तकों को अधिक स्थान दिया जाएगा। इनमें Rabindranath Tagore, Kazi Nazrul Islam और Swami Vivekananda की रचनाओं के साथ-साथ Chhatrapati Shivaji Maharaj और Maharana Pratap जैसी ऐतिहासिक विभूतियों की जीवनियां शामिल होंगी।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
पुस्तकालयों में पुस्तकों के चयन को लेकर राज्य सरकार के इस फैसले ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इसे साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सरकार का दावा है कि यह कदम पुस्तकालयों की गुणवत्ता और पाठकों के बौद्धिक विकास को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।
