शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बयानबाजी ममता कुलकर्णी को पड़ी भारी, किन्नर अखाड़े से हुईं निष्कासित
Jan 27, 2026, 20:26 IST
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प्रयागराज। माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनशन और उससे जुड़े विवाद के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शंकराचार्य को लेकर दिए गए बयानों के चलते किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो. डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी पर कड़ा कदम उठाया है। किन्नर अखाड़े ने यामाई ममता नंद गिरी उर्फ ममता कुलकर्णी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है।
गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के दौरान 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी। लेकिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उनके हालिया बयानों के बाद यह फैसला लिया गया।
बयान से अखाड़े ने झाड़ा पल्ला
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो. डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य को लेकर ममता कुलकर्णी का बयान उनका व्यक्तिगत विचार था, न कि किन्नर अखाड़े का रुख। इस विषय में न तो अखाड़े से कोई चर्चा की गई और न ही सामूहिक सहमति ली गई।
उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़ा हुआ है और वह किसी भी तरह के विवाद से खुद को दूर रखता है।
प्रशासनिक भूमिका पर उठाए सवाल
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि वह न तो शंकराचार्य को सही ठहराती हैं और न ही गलत, लेकिन प्रयागराज में जिस तरह से प्रशासन ने पूरे मामले को संभाला, वह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए थी और बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई मारपीट बेहद दुखद है।
क्यों किया गया निष्कासन
आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि ममता कुलकर्णी की ओर से बार-बार विवादित टिप्पणियों के चलते अखाड़े की छवि प्रभावित हो रही थी। किन्नर अखाड़ा किसी भी तरह का टकराव या विवाद नहीं चाहता। अखाड़े में किन्नर, महिला और पुरुष सभी शामिल हैं और सभी मिल-जुलकर शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं।
इसी वजह से किन्नर अखाड़े ने ममता कुलकर्णी से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला लिया और उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।
क्या था विवादित बयान
दो दिन पहले ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कहा था कि केवल चार वेद कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता और कानून सबके लिए समान है। इसी बयान के बाद विवा
गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के दौरान 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी। लेकिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उनके हालिया बयानों के बाद यह फैसला लिया गया।
बयान से अखाड़े ने झाड़ा पल्ला
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो. डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य को लेकर ममता कुलकर्णी का बयान उनका व्यक्तिगत विचार था, न कि किन्नर अखाड़े का रुख। इस विषय में न तो अखाड़े से कोई चर्चा की गई और न ही सामूहिक सहमति ली गई।
उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़ा हुआ है और वह किसी भी तरह के विवाद से खुद को दूर रखता है।
प्रशासनिक भूमिका पर उठाए सवाल
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि वह न तो शंकराचार्य को सही ठहराती हैं और न ही गलत, लेकिन प्रयागराज में जिस तरह से प्रशासन ने पूरे मामले को संभाला, वह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए थी और बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई मारपीट बेहद दुखद है।
क्यों किया गया निष्कासन
आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि ममता कुलकर्णी की ओर से बार-बार विवादित टिप्पणियों के चलते अखाड़े की छवि प्रभावित हो रही थी। किन्नर अखाड़ा किसी भी तरह का टकराव या विवाद नहीं चाहता। अखाड़े में किन्नर, महिला और पुरुष सभी शामिल हैं और सभी मिल-जुलकर शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं।
इसी वजह से किन्नर अखाड़े ने ममता कुलकर्णी से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला लिया और उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।
क्या था विवादित बयान
दो दिन पहले ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कहा था कि केवल चार वेद कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता और कानून सबके लिए समान है। इसी बयान के बाद विवा
