गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने पर मौलाना मदनी का बड़ा बयान, बोले- मुसलमानों को नहीं कोई आपत्ति, रुकेगी मॉब लिंचिंग
New Delhi : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को कहा कि यदि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करती है तो मुसलमानों को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि इससे गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाओं पर रोक लग सकती है।
मौलाना मदनी ने कहा कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को पवित्र मानती है और उसे ‘मां’ का दर्जा देती है, तो सरकार को उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल मुस्लिम संगठन ही नहीं, बल्कि कई साधु-संत भी लंबे समय से उठाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया है। उनके अनुसार, गौकशी और पशु तस्करी के नाम पर अफवाहें फैलाकर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रचार के कारण समाज के एक वर्ग में यह धारणा बना दी गई है कि मुसलमान गाय के विरोधी हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
मौलाना मदनी ने कहा कि पहले बड़ी संख्या में मुसलमान गाय पालते थे और दुग्ध व्यवसाय से जुड़े थे, लेकिन 2014 के बाद बदले माहौल के चलते कई लोगों ने एहतियातन गाय पालना कम कर दिया और भैंस पालन को अधिक सुरक्षित समझा जाने लगा। उन्होंने कहा कि साल 2014 में मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों और साधु-संतों के साथ मिलकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद हमेशा मुसलमानों को दूसरे धर्मों की भावनाओं का सम्मान करने और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचने की सलाह देता रहा है।
मौलाना मदनी ने समान नागरिक संहिता (UCC) और पशु वध कानूनों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब एक देश-एक कानून की बात की जाती है, तो पशु वध से जुड़े कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू क्यों नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में खुलेआम गोमांस का सेवन होता है, जबकि कुछ राज्यों में इसी मुद्दे पर हिंसा और राजनीति की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में मुसलमानों की आबादी अधिक है, वहां गाय के नाम पर राजनीति ज्यादा होती है, जबकि अन्य राज्यों में इस विषय पर अलग रवैया अपनाया जाता है।
मौलाना मदनी ने कहा कि गाय के मुद्दे पर दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए और यदि कोई कानून बने तो उसे पूरे देश में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है और इससे सामाजिक सौहार्द एवं न्यायपूर्ण व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
