मायावती ने यूजीसी के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का किया स्वागत, कहा- सभी पक्षों को ...
नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए लाए गए नए विनियम 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है। उन्होंने इसे उचित और सामाजिक तनाव को रोकने वाला फैसला बताया।
मायावती ने एक्स पर अपने बयान में कहा कि यूजीसी द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जारी किए गए नए नियमों से देश में सामाजिक तनाव का माहौल पैदा हो गया था। उन्होंने कहा, "वर्तमान हालात को देखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि यूजीसी ने इन नियमों को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लिया होता और जांच समितियों में अपेक्षित/वंचित समाज (अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़े वर्ग) को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत उचित प्रतिनिधित्व दिया होता, तो इस तरह का सामाजिक तनाव पैदा ही नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट ने आज यूजीसी विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन नए नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने नियमों को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि फिलहाल 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।
ये नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने और समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, लेकिन इन पर सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगते हुए विरोध और याचिकाएं दायर हुईं थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये प्रावधान समाज को विभाजित कर सकते हैं और इनके दुरुपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता।
