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महमूद मदनी के सुप्रीम कोर्ट, तीन तलाक और जिहाद वाली टिप्पणी पर मुस्लिम संगठनों में नाराजगी, SC पर लगाया पक्षपात का आरोप

New Delhi : मौलाना महमूद मदनी के सुप्रीम कोर्ट, तीन तलाक, बाबरी मस्जिद और ‘जिहाद’ पर दिए बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कोर्ट पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। “जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा” बयान को भड़काऊ बताकर मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों ने कड़ी आपत्ति जताई।

 
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New Delhi : जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी द्वारा सुप्रीम कोर्ट, तीन तलाक, बाबरी मस्जिद और ‘जिहाद’ को लेकर दिए गए बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान पर न सिर्फ मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई है, बल्कि राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

सुप्रीम कोर्ट पर पक्षपात के आरोप

मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट हाल के वर्षों में सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और अन्य मामलों में आए फैसलों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम है जब वह संविधान का पालन करे। अगर वह ऐसा नहीं करता तो सुप्रीम कहलाने का हकदार नहीं।

‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’ — बयान पर नाराजगी

मदनी ने ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुरान में ‘जिहाद’ का अर्थ उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि "जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।” उनके इस बयान को लेकर आरोप लग रहे हैं कि यह मुस्लिम युवाओं को भड़काने वाला है।

मदनी ने कहा कि धर्मांतरण कानून धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन है, जबकि ‘घर वापसी’ के नाम पर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (AIMJ) के प्रमुख शहाबुद्दीन रज़वी ने मदनी को सुप्रीम कोर्ट, संसद और सरकार पर टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों मुसलमान इन संस्थानों पर भरोसा करते हैं। धार्मिक नेता होकर उन्हें भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए।

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि दुनिया में मुसलमान सबसे सुरक्षित भारत में हैं। VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने आरोप लगाया कि मदनी जैसे नेता ‘जिहाद’ का गलत अर्थ देकर समाज में भ्रम फैला रहे हैं। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि कुरान के अनुसार जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना ही असली जिहाद है, लेकिन मदनी का बयान इस संदर्भ से मेल नहीं खाता।

मौलाना महमूद मदनी जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और एक प्रभावशाली धार्मिक नेता माने जाते हैं। वे 2006 से 2012 तक राज्यसभा सांसद भी रहे हैं तथा कई आतंकवाद-विरोधी सम्मेलन आयोजित कर चुके हैं।