Meta रिपोर्ट का खुलासा: साइबर क्राइम के मामले में दूसरे नंबर पर भारत, जानें लिस्ट में पहले नंबर पर कौन सा देश
Updated: Mar 28, 2026, 19:37 IST
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नई दिल्ली। साइबर क्राइम अब कोई दूर की आशंका नहीं, बल्कि एक खतरनाक हकीकत बन चुका है। यह एक संगठित वैश्विक इंडस्ट्री का रूप ले चुका है, जो हर दिन लाखों लोगों को अपने जाल में फंसा रही है। मार्च 2026 में जारी मेटा की एडवर्सेरियल थ्रेट रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों के मामलों में दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा निशाना बनने वाला देश बन गया है।
कौन है पहले और तीसरे नंबर पर?
इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंग्रेजी बोलने वाले यूजर्स की बड़ी संख्या और उच्च डिजिटल एक्टिविटी के चलते अमेरिका इंटरनेशनल साइबर ठगों के लिए सबसे आसान और बड़ा टारगेट बनता है।
वहीं, इजरायल तीसरे स्थान पर है, जहां रैनसमवेयर हमलों और हैक्टिविस्ट गतिविधियों की अधिकता के कारण साइबर खतरे लगातार बने रहते हैं।
भारत क्यों बना बड़ा निशाना?
भारत का दूसरे स्थान पर पहुंचना साइबर धोखाधड़ी के तेजी से बढ़ते मामलों को दर्शाता है। इसके पीछे कई बड़ी वजहें मानी जा रही हैं-
सस्ता और आसान इंटरनेट
स्मार्टफोन का तेजी से बढ़ता उपयोग
UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम का विस्तार
साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी
इन कारणों से स्कैमर्स अब भारतीय यूजर्स को बड़े पैमाने पर निशाना बना रहे हैं।
AI से और खतरनाक हुआ साइबर क्राइम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब साइबर अपराधी जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे नकली प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो और बेहद पर्सनलाइज्ड मैसेज तैयार कर लोगों को धोखा दे रहे हैं।
इस तकनीक की वजह से असली और नकली के बीच फर्क करना आम यूजर्स के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
गिरोह चला रहे हैं ‘साइबर बिजनेस’
साइबर अपराध अब केवल छोटे हैकर्स तक सीमित नहीं रहा।
बड़े संगठित गिरोह, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय, इस धोखाधड़ी को एक बिजनेस की तरह चला रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
कौन है पहले और तीसरे नंबर पर?
इस सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंग्रेजी बोलने वाले यूजर्स की बड़ी संख्या और उच्च डिजिटल एक्टिविटी के चलते अमेरिका इंटरनेशनल साइबर ठगों के लिए सबसे आसान और बड़ा टारगेट बनता है।
वहीं, इजरायल तीसरे स्थान पर है, जहां रैनसमवेयर हमलों और हैक्टिविस्ट गतिविधियों की अधिकता के कारण साइबर खतरे लगातार बने रहते हैं।
भारत क्यों बना बड़ा निशाना?
भारत का दूसरे स्थान पर पहुंचना साइबर धोखाधड़ी के तेजी से बढ़ते मामलों को दर्शाता है। इसके पीछे कई बड़ी वजहें मानी जा रही हैं-
सस्ता और आसान इंटरनेट
स्मार्टफोन का तेजी से बढ़ता उपयोग
UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम का विस्तार
साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी
इन कारणों से स्कैमर्स अब भारतीय यूजर्स को बड़े पैमाने पर निशाना बना रहे हैं।
AI से और खतरनाक हुआ साइबर क्राइम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब साइबर अपराधी जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे नकली प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो और बेहद पर्सनलाइज्ड मैसेज तैयार कर लोगों को धोखा दे रहे हैं।
इस तकनीक की वजह से असली और नकली के बीच फर्क करना आम यूजर्स के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
गिरोह चला रहे हैं ‘साइबर बिजनेस’
साइबर अपराध अब केवल छोटे हैकर्स तक सीमित नहीं रहा।
बड़े संगठित गिरोह, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय, इस धोखाधड़ी को एक बिजनेस की तरह चला रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
