मोदी सरकार का बड़ा फैसला! नई यूरिया नीति से किसानों को राहत, देश में लगेंगे 7 नए प्लांट
केंद्र सरकार ने नई यूरिया निवेश नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत देश में सात नए यूरिया संयंत्र स्थापित होंगे, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का लक्ष्य किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराना और खाद सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
New Urea Policy 2026: देश को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई यूरिया निवेश नीति (New Urea Investment Policy 2026) को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना है। नई नीति के तहत देशभर में सात नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
आठ वर्षों तक मिलेगा सरकारी समर्थन
सरकार की नई नीति के तहत नए यूरिया संयंत्रों को उत्पादन शुरू होने की तारीख से आठ वर्षों तक गारंटीड खरीद (Guaranteed Buyback) और सब्सिडी ढांचे का लाभ मिलेगा। इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को नए निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ सकेगी।
सात नए प्लांट से बढ़ेगा उत्पादन
नई नीति के तहत ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। अनुमान है कि अगले आठ वर्षों में देश का यूरिया उत्पादन करीब 90 से 100 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ सकता है। इससे भारत की विदेशी बाजारों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
आयात का बोझ होगा कम
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में शामिल है। घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए हर वर्ष बड़ी मात्रा में यूरिया आयात करना पड़ता है। वैश्विक बाजार में कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयात महंगा पड़ता है। नई नीति का उद्देश्य इसी निर्भरता को कम करना है।
किसानों को क्या मिलेगा फायदा?
घरेलू उत्पादन बढ़ने से किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने में आसानी होगी। सरकार का मानना है कि इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर होगी और खेती की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही देश की खाद सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
पहले भी बढ़ी है उत्पादन क्षमता
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार कई नए उर्वरक संयंत्र शुरू कर चुकी है, जिससे देश की वार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब नई निवेश नीति के जरिए इस क्षमता को और आगे बढ़ाने की तैयारी की गई है, ताकि भविष्य में आयात की आवश्यकता लगातार घटती जाए।
खाद सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि नई यूरिया नीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की खाद सुरक्षा, कृषि क्षेत्र की स्थिरता और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूत करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को हर मौसम में बिना किसी बाधा के पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।
