1 दशक में 43 हजार से ज्यादा बच्चियों का रेप, 97% मामलों में परिचित आरोपी; NCRB के चौंकाने वाले आंकड़े
नई दिल्ली। बिहार के जमुई, समस्तीपुर और बांका से लेकर दिल्ली के कालकाजी और ओडिशा के धेनकनाल तक हाल में सामने आई महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग के बीच नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े समस्या की व्यापकता की ओर इशारा करते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में नाबालिग लड़कियों से रेप के दर्ज मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और दोषसिद्धि की दर करीब 30 प्रतिशत के आसपास रही है।
2015 से 2024 के बीच करीब चार गुना बढ़े मामले
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में 18 साल से कम उम्र की 10,934 लड़कियों से रेप के मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 43,675 तक पहुंच गई।
इस तरह एक दशक में दर्ज मामलों की संख्या करीब चार गुना हो गई। आंकड़े बताते हैं कि हर साल बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियां यौन हिंसा का शिकार हुई हैं।
पांच साल में 1.83 लाख नाबालिग लड़कियों से रेप के मामले
2020 से 2024 के बीच देशभर में करीब 1.83 लाख नाबालिग लड़कियों से रेप के मामले दर्ज किए गए। POCSO कानून के तहत दर्ज होने वाले यौन अपराधों में रेप के मामलों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।
इसी पांच साल की अवधि में बिना पेनेट्रेशन वाले यौन उत्पीड़न के 96,505 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा छेड़छाड़ से जुड़े 12,807 मामले और बच्चों को पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल किए जाने के 2,924 मामले सामने आए। अन्य श्रेणियों के यौन अपराधों में 3,034 मामले दर्ज किए गए।
16 से 18 साल की लड़कियां सबसे ज्यादा प्रभावित
उम्र के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 2020 से 2024 के बीच किशोर उम्र की लड़कियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं।
16 से 18 वर्ष की लड़कियों से रेप के 94,503 मामले दर्ज किए गए, जबकि 12 से 16 वर्ष के आयु वर्ग में 70,442 मामले सामने आए। यानी दर्ज मामलों में पीड़िताओं का बड़ा हिस्सा 12 से 18 वर्ष के आयु वर्ग से था।
2024 में 86% मामले अदालतों में लंबित
बढ़ते मामलों के बीच न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले एक दशक में इन मामलों में दोषसिद्धि की दर करीब 30 प्रतिशत रही, जबकि लंबित मामलों का स्तर 85 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया।
2024 में नाबालिग लड़कियों से रेप के मामलों में दोषसिद्धि दर करीब 30 प्रतिशत रही। इसी दौरान लगभग 86 प्रतिशत मामले अदालतों में लंबित थे।
POCSO से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए विशेष और फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में मामलों का लंबित रहना पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने को लेकर सवाल खड़े करता है।
97% मामलों में आरोपी पीड़िता का परिचित
NCRB के आंकड़ों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी पीड़िता के लिए कोई अजनबी नहीं था।
2024 में नाबालिग लड़कियों से रेप के करीब 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़िता की जान-पहचान का व्यक्ति था। इनमें दोस्त, पड़ोसी, रिश्तेदार, परिवार से जुड़े लोग और शादी का झांसा देने वाले परिचित शामिल थे।
ये आंकड़े बताते हैं कि बच्चियों की सुरक्षा का सवाल केवल सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है। घर, परिवार और परिचितों के दायरे में होने वाले यौन अपराधों की रोकथाम, मामलों की समयबद्ध जांच और अदालतों में लंबित मुकदमों के जल्द निपटारे की चुनौती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
