सांसद वीरेंद्र सिंह ने PM मोदी को सौंपा ज्ञापन, ऐतिहासिक संस्था की जमीनों की जांच और किसानों के हित में की बड़ी मांग
चंदौली। लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर दो महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए दोनों मामलों में उच्चस्तरीय जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि वाराणसी के कमच्छा स्थित द इंडियन सेक्शन ऑफ द थियोसोफिकल सोसायटी (मुख्यालय) की स्थापना वर्ष 1903 में डॉ. एनी बेसेंट ने शिक्षा और समाजसेवा के उद्देश्य से की थी। उन्होंने बताया कि संस्था को देशभर में हजारों एकड़ भूमि दान स्वरूप प्राप्त हुई थी।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संस्था की संपत्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि संस्था की भूमि का एक हिस्सा दयाल ग्रुप को लीज पर देकर होटल निर्माण कराया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। इसके साथ ही बिहार के छपरा स्थित थियोसोफिकल लॉज से जुड़ी कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।
सांसद ने प्रधानमंत्री से देशभर में ऐसी दान में मिली संस्थागत संपत्तियों का व्यापक सर्वेक्षण कराकर उन्हें अवैध कब्जों और दुरुपयोग से सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा और समाजसेवा के लिए दान की गई संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इसके अलावा सांसद ने चंदौली सहित उत्तर प्रदेश के किसानों से जुड़े भूमि अधिग्रहण मुआवजे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 15 वर्षों से सर्किल रेट में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण किसानों को बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम मुआवजा मिल रहा है।
वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत समेत कई राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का मुआवजा काफी कम है। उन्होंने चंदौली सहित पूरे प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ाकर कम से कम 20 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर किए जाने की मांग की।
सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि दोनों मामलों में संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए जाएं, ताकि संस्थागत संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और किसानों को भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा मिल सके।
