MPSC Protest: पेपर लीक से अध्यक्ष के विवाद तक, जानिए किन आश्वासनों के बाद खत्म हुआ पुणे में छात्रों का आंदोलन
महाराष्ट्र में 11 दिनों से चल रहा MPSC छात्रों का आंदोलन खत्म हो गया है। सरकार ने अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने, पांच सदस्यीय जांच आयोग बनाने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार का भरोसा दिया। जानिए तुकाराम मुंढे की भूमिका और छात्रों की प्रमुख मांगें।
पुणे। महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों को लेकर 11 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन खत्म हो गया है। सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग गठित करने, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार समेत कई आश्वासन दिए हैं। इसके बाद 12 अक्टूबर को छात्र प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।
इस आंदोलन में सबसे बड़ा विवाद आयोग के अध्यक्ष को लेकर था। छात्र विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार का कहना था कि उन्हें पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा। आखिरकार अध्यक्ष को छुट्टी पर भेजने के फैसले से बातचीत का रास्ता निकला। हालांकि, इसे अध्यक्ष का इस्तीफा या पद से स्थायी हटाया जाना नहीं माना जा सकता।
अध्यक्ष के इस्तीफे पर क्यों अटकी थी बातचीत?
पुणे में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग थी कि MPSC की परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
सरकार ने जांच कराने का भरोसा दिया, लेकिन छात्र केवल जांच की घोषणा से संतुष्ट नहीं थे। उनका तर्क था कि परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए और आयोग के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अध्यक्ष को हटाने के मामले में संवैधानिक प्रक्रिया का हवाला दिया था। संविधान के अनुच्छेद 317 में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को पद से हटाने की प्रक्रिया का प्रावधान है। इसी वजह से सरकार तत्काल इस्तीफे की मांग पर सहमत नहीं हुई।
रविवार रात की बैठक में कैसे निकला समाधान?
11 अक्टूबर की रात मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई।
चर्चा में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल रहे। अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं बनने के बाद उन्हें जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का विकल्प सामने आया।
सरकार के इस फैसले से छात्रों की तत्काल कार्रवाई की मांग और अध्यक्ष को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया के बीच एक रास्ता निकला। इसके बाद छात्र प्रतिनिधियों ने आपस में चर्चा की और 12 अक्टूबर को आंदोलन स्थगित करने का ऐलान किया।
इस तरह आंदोलन खत्म होने की मुख्य वजह अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं, बल्कि उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला और अन्य मांगों पर मिले आश्वासन रहे।
तुकाराम मुंढे को मिली अहम जिम्मेदारी, 60 दिन में जांच रिपोर्ट
MPSC मामले की जांच के लिए सरकार ने पांच सदस्यीय आयोग गठित करने की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोंसले करेंगे। वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव बनाया गया है।
आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक, अधिकारी लखमी गौतम और सेवानिवृत्त अधिकारी गणेश पाटील को भी शामिल किया गया है।
जांच आयोग के सामने प्रमुख रूप से ये मुद्दे होंगे:
ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की जांच।
MPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की पड़ताल।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों की समीक्षा।
अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों और सबूतों पर विचार।
आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। अब उसकी जांच के निष्कर्षों से तय होगा कि कथित अनियमितताओं के मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
आंदोलन को मिला रोहित पवार और राज ठाकरे का समर्थन
MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने और आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज होने की खबरों ने भी विवाद को गंभीर बना दिया था। इसके बाद छात्रों की मांगों में आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने का मुद्दा भी शामिल हो गया।
भर्ती प्रक्रिया और पुलिस मामलों पर क्या मिला आश्वासन?
सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी कई आश्वासन दिए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती और 2027 की ग्रुप-C भर्ती में पदों की संख्या दोगुनी करने की बात कही गई है।
इसके अलावा आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने का आश्वासन भी दिया गया है।
हालांकि, इन घोषणाओं और आश्वासनों को लागू करने के लिए संबंधित सरकारी आदेश और आगे की कार्रवाई अहम होगी। इसलिए फिलहाल इन्हें पूरी हो चुकी कार्रवाई के बजाय सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आंदोलन खत्म, लेकिन विवेक भीमनवार पर अंतिम फैसला बाकी
11 दिनों के प्रदर्शन के बाद पुणे में आंदोलन तो थम गया है, लेकिन MPSC अध्यक्ष को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्रों की मांग अध्यक्ष के इस्तीफे की थी, जबकि सरकार ने उन्हें जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का रास्ता चुना।
दोनों स्थितियों में अंतर है। छुट्टी पर भेजे जाने का मतलब पद से स्थायी रूप से हटाया जाना नहीं है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती तय समय में जांच पूरी कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और भर्ती प्रक्रिया को लेकर दिए गए आश्वासनों पर अमल करने की है। छात्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की उनकी मांग अब भी बनी हुई है।
