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गेहूं की MSP में ₹25 की बढ़ोतरी, अब ₹2,610 प्रति क्विंटल, जानें चना-मसूर-सरसों समेत 6 फसलों के नए रेट

 
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं समेत छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। गेहूं के MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके बाद गेहूं का नया MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में यह ₹2,585 था।

सरकार के इस फैसले में गेहूं के अलावा जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम भी शामिल हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन में इन फसलों की MSP पर खरीद के लिए किसानों को करीब ₹90,962 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

गेहूं का MSP अब ₹2,610 प्रति क्विंटल

गेहूं देश की प्रमुख रबी फसलों में शामिल है। नई दर के मुताबिक किसानों को गेहूं के लिए ₹2,610 प्रति क्विंटल का MSP मिलेगा। पिछले मार्केटिंग सीजन में यह ₹2,585 प्रति क्विंटल था।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक गेहूं की उत्पादन लागत करीब ₹1,264 प्रति क्विंटल बताई गई है। नई MSP दर इसके मुकाबले काफी अधिक है। इससे सरकार द्वारा तय MSP और उत्पादन लागत के बीच अंतर को लेकर सरकार का दावा स्पष्ट होता है।

बाकी रबी फसलों के नए MSP

गेहूं के साथ पांच अन्य रबी फसलों के MSP में भी बढ़ोतरी की गई है। नए रेट इस प्रकार हैं:

फसल 2026-27 MSP 2027-28 नया MSP
गेहूं ₹2,585 ₹2,610
जौ ₹2,150 ₹2,286
चना ₹5,875 ₹5,958
मसूर ₹7,000 ₹7,390
सरसों ₹6,200 ₹6,613
कुसुम ₹6,540 ₹7,215

इस सूची में मसूर के MSP में ₹390 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुसुम का MSP ₹675 प्रति क्विंटल बढ़ा है।

किसानों को कितना मिलेगा भुगतान?

सरकार के अनुमान के अनुसार 2027-28 के रबी मार्केटिंग सीजन में करीब 324 लाख टन रबी फसलों की खरीद का अनुमान है। इसके लिए किसानों को कुल करीब ₹90,962 करोड़ का MSP भुगतान होने का अनुमान है।

MSP तय करने की प्रक्रिया में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को आधार बनाया जाता है। इसमें खेती की लागत के अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों, मांग-आपूर्ति तथा अन्य आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है।

किसानों के लिए MSP बढ़ने का क्या मतलब?

MSP वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार निर्धारित फसलों की खरीद करती है। हालांकि MSP बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि देश के हर किसान को उसकी पूरी उपज इसी कीमत पर अनिवार्य रूप से बिकेगी। वास्तविक लाभ खरीद व्यवस्था, मंडी की स्थिति, फसल की गुणवत्ता और सरकारी खरीद के दायरे पर भी निर्भर करता है।

गेहूं की MSP में बढ़ोतरी ऐसे समय की गई है जब नई रबी फसल की बुवाई का मौसम करीब है। गेहूं की बुवाई आम तौर पर अक्टूबर-नवंबर में होती है और इसकी कटाई अगले साल मार्च-अप्रैल के आसपास शुरू होती है।

कैबिनेट ने लिए दो और बड़े फैसले

30 सितंबर 2026 की कैबिनेट बैठक में MSP के अलावा ऊर्जा और दिल्ली के ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दो अन्य फैसले भी लिए गए।

PM DHARA योजना को मंजूरी

कैबिनेट ने रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए PM DHARA कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के लिए करीब ₹1.86 लाख करोड़ का प्रावधान बताया गया है।

दिल्ली में ITMS लागू करने का फैसला

दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए Intelligent Traffic Management System (ITMS) को भी मंजूरी दी गई है। इसके लिए करीब ₹1,790 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाना और यातायात प्रबंधन को बेहतर करना है।

इस तरह 30 सितंबर की कैबिनेट बैठक में रबी फसलों के MSP, रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन और दिल्ली के ट्रैफिक सिस्टम से जुड़े तीन बड़े फैसले लिए गए।