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छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, आयोजकों की जवाबदेही तय करने की उठी मांग

 
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New Delhi : छात्र प्रदर्शन से जुड़े उपद्रव के मामलों को राजनीतिक समझौते के आधार पर वापस लेने का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने प्रदर्शन के आयोजकों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए एक साथ सुनवाई करने का फैसला किया है।

याचिकाकर्ता मनीष सोलंकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद रिजवान अहमद ने अदालत में कहा कि सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन प्रदर्शन के आयोजकों के प्रति नरमी बरती जा रही है। उनका कहना था कि आयोजकों ने पुलिस से किए गए वादे का पालन नहीं किया और उग्र भीड़ को संसद की ओर बढ़ने दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि भीड़ संसद परिसर में प्रवेश कर जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अदालत छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के पक्ष में नहीं है। कोर्ट का मानना है कि युवाओं को समझाने और सही मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है तथा अत्यधिक सख्ती से हालात और बिगड़ सकते हैं।

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि हिंसा, पथराव और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों से सामुदायिक सेवा कराकर उन्हें अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जा सकता है।

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा और इस मामले की अगली सुनवाई अन्य लंबित याचिकाओं के साथ की जाएगी।