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नितिन गडकरी: भारत में ब्राजील मॉडल पर दौड़ेगा इथेनॉल, पेट्रोल पर निर्भरता खत्म करने का मास्टर प्लान तैयार
 

 
 नितिन गडकरी: भारत में ब्राजील मॉडल पर दौड़ेगा इथेनॉल, पेट्रोल पर निर्भरता खत्म करने का मास्टर प्लान तैयार
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नई दिल्ली। देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखा है। ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय में 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

ऊर्जा संकट और आत्मनिर्भरता पर जोर

गडकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक तेल आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण भारत ऊर्जा संकट की स्थिति का सामना कर सकता है। ऐसे में देश को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिस पर करीब 22 लाख करोड़ रुपये का भारी खर्च होता है। यह न केवल आर्थिक बोझ है बल्कि पर्यावरण प्रदूषण का भी बड़ा कारण है।

इथेनॉल और वैकल्पिक ईंधन पर फोकस

मंत्री ने कहा कि ब्राजील जैसे देशों ने 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की दिशा में सफल प्रयोग किए हैं और भारत को भी उसी मॉडल को अपनाना चाहिए। उन्होंने जैव-ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार लोगों को पेट्रोल और डीजल वाहनों से रोक नहीं सकती, लेकिन वैकल्पिक ईंधन को इतना सस्ता और प्रभावी बनाया जाएगा कि लोग खुद इसकी ओर आकर्षित हों।

सर्कुलर इकोनॉमी और रोजगार के अवसर

उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना जरूरी है। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

इथेनॉल पर चल रही बहस और भविष्य की तकनीक

ई20 इथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चिंताओं पर गडकरी ने कहा कि कुछ लॉबी इस बदलाव का विरोध कर रही हैं, लेकिन यह देश के हित में है।

उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा। भारत को सस्ती दर पर हाइड्रोजन उत्पादन और उसके भंडारण व परिवहन की तकनीक विकसित करनी होगी।

गडकरी ने सुझाव दिया कि कचरे से हाइड्रोजन उत्पादन पर भी गंभीरता से काम किया जाना चाहिए, जिससे ऊर्जा उत्पादन लागत कम हो सके और भारत ऊर्जा निर्यातक देश बन सके।