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ITBP के 65वें स्थापना दिवस पर PM मोदी ने 'हिमवीरों' को किया सलाम, अमित शाह बोले- बर्फीले पहाड़ों में गूंजता है जवानों का शौर्य
 

 
ITBP के 65वें स्थापना दिवस पर PM मोदी ने 'हिमवीरों' को किया सलाम, अमित शाह बोले- बर्फीले पहाड़ों में गूंजता है जवानों का शौर्य
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नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवानों को शुभकामनाएं दीं। देश की दुर्गम सीमाओं पर तैनात आईटीबीपी के जवानों के अदम्य साहस, वीरता, बलिदान और राष्ट्रसेवा की सराहना करते हुए नेताओं ने उन्हें देश की सुरक्षा का मजबूत प्रहरी बताया।

पीएम मोदी ने हिमवीरों के साहस को बताया देश के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आईटीबीपी के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि बल के हिमवीरों ने अपने असाधारण साहस और वीरता से अलग पहचान बनाई है। उन्होंने हर चुनौती का सामना अद्भुत दृढ़ संकल्प के साथ किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आईटीबीपी के जवानों की निस्वार्थ सेवा और बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनका समर्पण सराहनीय है।

अमित शाह बोले- बर्फीले पहाड़ों में गूंजता है जवानों का शौर्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आईटीबीपी के जवानों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बर्फ से ढके पहाड़ों में जवानों का शौर्य गूंजता है और देश की सुरक्षा के सामने आने वाली हर चुनौती का मुकाबला करने का उनका संकल्प अद्वितीय है।

अमित शाह ने कहा कि बेहद कठिन मौसम और दुर्गम इलाकों में भी जवान पूरी मुस्तैदी से देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजनाथ सिंह ने सीमा सुरक्षा में योगदान की सराहना की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईटीबीपी के जवानों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि हिमवीरों ने अत्यंत कठिन मौसम में भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि आईटीबीपी का योगदान केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बल ने आंतरिक सुरक्षा अभियानों और वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। जवानों का साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा राष्ट्रसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आईटीबीपी के आदर्श वाक्य 'शौर्य-दृढ़ता-कर्मनिष्ठा' का उल्लेख करते हुए जवानों के साहस और देशभक्ति को सलाम किया।

भारतीय सेना ने भी दी स्थापना दिवस की बधाई

आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस पर भारतीय सेना ने भी बल के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी रैंकों की ओर से आईटीबीपी के साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की सराहना की गई।

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता

आईटीबीपी का स्थापना दिवस ऐसे समय मनाया जा रहा है, जब भारत-चीन सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयास लगातार जारी हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा पर गलतफहमी और गलत आकलन की स्थिति से बचने तथा सीमा प्रबंधन को मजबूत बनाने के उपायों पर बातचीत जारी रखे हुए हैं।

इसी बीच आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। बल की सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून तैयार किए गए हैं। साथ ही गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

1962 में हुई थी आईटीबीपी की स्थापना

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को हुई थी। यह बल लद्दाख के काराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश तक लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बर्फीले पहाड़ों, ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों और बेहद कम तापमान में तैनात आईटीबीपी के जवानों को 'हिमवीर' कहा जाता है। सीमा सुरक्षा के साथ-साथ यह बल आपदा राहत, बचाव कार्यों और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारियां भी निभाता है।