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क्यों मणिपुर के हजारों लोग बसाए जा रहे हैं इज़राइल में? जानिए इस मिशन का पूरा सच

इज़राइल ने ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ के तहत मणिपुर के ब्नेई मेनाशे समुदाय के 5000 लोगों को बसाने की योजना शुरू की है। यह समुदाय खुद को इज़राइल की खोई हुई जनजाति मानता है। इस कदम के पीछे धार्मिक, रणनीतिक और आर्थिक कारण भी बताए जा रहे हैं।

 
Operation Wings of Dawn
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Operation Wings of Dawn: इज़राइल ने भारत से करीब 4000 किलोमीटर दूर एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है, जिसका नाम ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ रखा गया है। इस मिशन के तहत मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत में रहने वाले ब्नेई मेनाशे समुदाय के करीब 5000 लोगों को इज़राइल में बसाया जाएगा।

इस अभियान के तहत पहली खेप में लगभग 250 लोगों को दिल्ली के रास्ते इज़राइल पहुंचाया जा चुका है। इज़राइली सरकार की योजना है कि हर साल करीब 1200 लोगों को वहां बसाया जाएगा।

कौन हैं ब्नेई मेनाशे?

ब्नेई मेनाशे समुदाय खुद को प्राचीन इज़राइल की “खोई हुई जनजातियों” में से एक मानता है। माना जाता है कि सदियों पहले ये लोग इज़राइल से पलायन कर पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रों- खासकर मणिपुर और मिजोरम—में आ बसे। बीते दो दशकों में इस समुदाय के करीब 5000 लोग पहले ही इज़राइल में बस चुके हैं। अब शेष लोगों को भी वहां ले जाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

धार्मिक आस्था से लेकर पहचान की तलाश तक

इस समुदाय के लिए यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर वापसी माना जा रहा है। कई सदस्य इसे “प्रॉमिस्ड लैंड” यानी वादा की गई धरती तक पहुंचने का सफर बताते हैं। हालांकि, इज़राइल पहुंचने के बाद उन्हें वहां की नागरिकता पाने के लिए औपचारिक रूप से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इज़राइल क्यों कर रहा है यह पहल?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के पीछे केवल धार्मिक कारण ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक वजहें भी हैं:

  • इज़राइल लंबे समय से युद्ध की स्थिति में है, जिससे वहां श्रमिकों की कमी हो गई है
  • नेपाल और थाईलैंड जैसे देशों से आने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या घटी है
  • नए लोगों को बसाकर बॉर्डर क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बनाने की कोशिश
  • निर्माण और श्रम क्षेत्रों में कार्यबल बढ़ाने की आवश्यकता
  • बेहतर जीवन की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां भी

मणिपुर में जहां इस समुदाय के लोग खेती या छोटे-मोटे कामों में लगे थे, वहीं इज़राइल में उन्हें ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बेहतर वेतन मिलने की संभावना है। हालांकि, वहां की हाई-टेक लाइफस्टाइल में ढलना, भाषा सीखना और नस्लीय भेदभाव जैसी समस्याएं भी उनके सामने चुनौती बन सकती हैं।

मणिपुर हिंसा के बाद बढ़ी पलायन की इच्छा

2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के बाद इस समुदाय के जीवन पर गहरा असर पड़ा है। असुरक्षा और आर्थिक कठिनाइयों के चलते अब बड़ी संख्या में लोग इज़राइल जाने को तैयार हैं।