कागज़ों का झंझट खत्म: अब Birth Certificate और Aadhaar एक ही प्रक्रिया में जुड़ेगे
New Delhi : देश में बढ़ती डिजिटल जरूरतों के चलते सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) और आधार कार्ड (Aadhaar) को एक ही प्रक्रिया में आपस में जोड़ने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस सुविधा का उद्देश्य है कि बच्चे के जन्म के समय ही उसकी पहचान का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से तैयार हो जाए और भविष्य में किसी भी सरकारी कार्य में दस्तावेज़ बार-बार जमा न करने पड़ें।
पहले जहां जन्म प्रमाणपत्र को आधार से लिंक करने के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था, वहीं अब दोनों दस्तावेज एक साथ और स्वतः लिंक हो जाएंगे। इससे समय की बचत होगी और कागजी प्रक्रियाओं में भी कमी आएगी।
जन्म के साथ कैसे होगी लिंकिंग?
- अस्पताल में जन्म के बाद बच्चे की जानकारी तुरंत CRS (Civil Registration System) पोर्टल पर दर्ज की जाती है।
- इसी रजिस्ट्रेशन में बच्चे का नाम, जन्मतिथि, समय, लिंग और माता-पिता के विवरण शामिल होते हैं।
- नए सिस्टम में यहीं से आधार अपडेट प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
- आवेदन के दौरान आधार विकल्प चुनकर माता-पिता का आधार नंबर दर्ज किया जाता है।
- छोटे बच्चों का बायोमेट्रिक तुरंत नहीं लिया जाता, इसलिए अस्थायी आधार नंबर जारी किया जाता है, जिसे बाद में अपडेट किया जा सकता है।
- यदि सभी जानकारी सही मैच होती है, तो जन्म प्रमाणपत्र और आधार अपने आप लिंक हो जाते हैं।
- इस पूरी प्रक्रिया के लिए अब किसी सरकारी दफ्तर में लाइन लगाने की जरूरत नहीं होती।

यदि बच्चे के पास पहले से जन्म प्रमाणपत्र और आधार मौजूद है, तो लिंकिंग की प्रक्रिया भी आसान है:
- CRS की आधिकारिक वेबसाइट में जाएं।
- General Public Sign Up पर अकाउंट बनाएं और लॉगिन करें।
- Birth Registration सेक्शन में जाएं और Aadhaar Link विकल्प चुनें।
- जन्म पंजीकरण नंबर, आधार नंबर और मोबाइल OTP दर्ज करें।
रिकॉर्ड मैच होने पर दोनों दस्तावेज तुरंत लिंक हो जाते हैं। यदि कोई जानकारी गलत है तो पहले जन्म प्रमाणपत्र में संशोधन करना होता है। कुछ राज्यों में यह सुविधा UIDAI सर्विस सेंटर पर भी उपलब्ध है।
लिंकिंग के फायदे
- स्कूल एडमिशन आसान
- सरकारी योजनाओं का तुरंत लाभ
- बीमा और पासपोर्ट प्रक्रियाएं तेज
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया सरल
- बार-बार डॉक्यूमेंट जमा करने की जरूरत नहीं
सरकार का कहना है कि डिजिटल यूनिफाइड रिकॉर्ड से भविष्य में पैरेंट-चाइल्ड पहचान और सत्यापन प्रक्रिया और मजबूत होगी।
