Movie prime

धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पप्पू यादव ने खोला मोर्चा, बोले- श्रीकृष्ण का अपमान बर्दाश्त नहीं
 

 
 धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पप्पू यादव ने खोला मोर्चा, बोले- श्रीकृष्ण का अपमान बर्दाश्त नहीं
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में कड़ा विरोध जताते हुए मंगलवार, 3 नवंबर को दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर पप्पू यादव ने जताई नाराजगी

पप्पू यादव ने थाने पहुंचने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा कि भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सांसद ने अपनी पोस्ट में कथावाचक के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनकी माफी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई कराकर दोषी को सजा दिलाने का प्रयास करेंगे।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया।

उनकी टिप्पणी को लेकर कई धार्मिक संगठनों, कृष्ण भक्तों और राजनीतिक नेताओं ने नाराजगी जताई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी बयान की आलोचना की है।

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी विनोद और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में थी। उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करना या भगवान राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा करना नहीं था।