BRICS Summit में PM मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मुलाकात, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर भी नजर
New Delhi : ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और क्षेत्रीय शांति, नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने साझा की जानकारी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। दो सप्ताह से भी कम समय में दोनों नेताओं की यह दूसरी बैठक है। इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स से जुड़ी बैठकों में ईरान की नियमित और उच्चस्तरीय भागीदारी की सराहना की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता, नौवहन एवं व्यापार की स्वतंत्रता तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों पर जोर दिया।
ईरानी राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धांजलि
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के भारत दौरे से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। इन तस्वीरों में उस स्थान पर श्रद्धांजलि दी गई, जहां ईरान के मिनाब में मारे गए बच्चों की याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रपति पेजेश्कियान इस दौरान भारत के धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और कारोबारियों से भी मुलाकात करेंगे।
BRICS बिजनेस फोरम में क्या बोले पेजेश्कियान?
इससे पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि दुनिया इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने वैश्विक आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इन चुनौतियों पर ब्रिक्स का क्या जवाब होना चाहिए। पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब अधिक स्पष्ट होती है, जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदला जाता है।
उन्होंने संभावित सहयोग को वास्तविक और व्यावहारिक सहयोग में बदलने की जरूरत पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच बैठक क्यों अहम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बैठक पश्चिम एशिया के तनाव, रणनीतिक कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान के संघर्ष को लेकर क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है।
ईरान भारत से कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बातचीत के रास्ते खोलने की उम्मीद जताता रहा है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़ी किसी भी संभावित बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और नौवहन पर पड़ सकता है।
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह, क्षेत्रीय व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसे में मोदी-पेजेश्कियान की बैठक को क्षेत्रीय शांति के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
