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Fragile Five क्या है? PM मोदी ने लाल किले से क्यों याद किया 2013 का वो दौर, जानिए पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भारत के ‘Fragile Five’ से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने तक के सफर का जिक्र किया। जानिए 2013 में भारत को Fragile Five में क्यों रखा गया था, उस समय अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या थी और पिछले 12 वर्षों में कितना बदलाव आया।
 
Fragile Five
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What is Fragile Five: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय दुनिया भारत को ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में गिनती थी, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने तेजी से बदलाव किया है और आज भारत दुनिया की प्रमुख और सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

पीएम मोदी का यह बयान उस दौर की याद दिलाता है, जब भारत समेत पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक आर्थिक झटकों के लिहाज से कमजोर माना जा रहा था। आखिर ‘Fragile Five’ क्या था और भारत इस सूची में क्यों आया था? इसकी कहानी 2013 के आर्थिक हालात से जुड़ी है।

2013 में सामने आया था ‘Fragile Five’ शब्द

‘Fragile Five’ शब्द का इस्तेमाल पहली बार 2013 में वैश्विक निवेश बैंक Morgan Stanley ने किया था। इस शब्द से उन पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बताया गया था, जिन्हें बाहरी वित्तीय झटकों के प्रति अपेक्षाकृत ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा था।

इस समूह में भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की शामिल थे। उस समय इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर विदेशी पूंजी के प्रवाह और वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों का काफी असर पड़ रहा था।

भारत को ‘Fragile Five’ में क्यों रखा गया था?

2013 के आसपास भारत की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही थी। महंगाई ऊंचे स्तर पर थी, चालू खाते का घाटा बढ़ रहा था और रुपये पर दबाव बना हुआ था। इसके अलावा विदेशी पूंजी पर निर्भरता भी एक बड़ी चिंता थी।

उस समय अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ओर से बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे बॉन्ड खरीद कार्यक्रम को धीरे-धीरे कम करने के संकेत मिले थे। इससे दुनिया भर के निवेशकों का पैसा उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिका की ओर जाने का खतरा बढ़ गया था।

भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति इसलिए चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि विदेशी निवेश में अचानक कमी आने पर मुद्रा और आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता था।

चालू खाते का घाटा भी बना बड़ी वजह

उस दौर में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) भी चिंता का बड़ा कारण था। 2012 में भारत का चालू खाते का घाटा GDP के करीब 5.1 फीसदी तक पहुंच गया था।

सरल भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि भारत विदेशों से जितना कमा रहा था, उसकी तुलना में विदेशों से खरीद और दूसरे अंतरराष्ट्रीय भुगतान ज्यादा हो रहे थे। ऐसे हालात में अर्थव्यवस्था को विदेशी पूंजी की जरूरत बढ़ जाती है और वैश्विक बाजार में अचानक बदलाव होने पर जोखिम भी बढ़ जाता है।

रुपये पर भी पड़ा था भारी दबाव

उस समय भारतीय रुपये में भी तेज गिरावट देखने को मिली थी। कुछ ही महीनों में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले करीब 12 फीसदी तक कमजोर हुई।

विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने, वैश्विक बाजार में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदों और भारत के बाहरी आर्थिक असंतुलन ने रुपये पर दबाव बढ़ाया था। यही वजह थी कि भारत को बाहरी आर्थिक झटकों के प्रति संवेदनशील अर्थव्यवस्थाओं में गिना गया।

2014 में भारत ‘Fragile Five’ से बाहर निकला

हालांकि भारत की स्थिति लंबे समय तक ऐसी नहीं रही। 2014 तक देश के बाहरी आर्थिक संकेतकों में सुधार हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ और बाहरी असंतुलन कम होने लगा।

इसी बदलाव के साथ भारत ‘Fragile Five’ की चर्चा से बाहर निकल गया। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, IMF ने भी उस दौर में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक सुधार को उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उल्लेखनीय बदलावों में गिना था।

PM मोदी ने 12 साल के बदलाव का किया जिक्र

लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने इसी आर्थिक बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोगों के प्रयासों ने भारत को ‘Fragile Five’ से निकालकर एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने में भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति को आम लोगों के प्रयासों से जोड़ा।

भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री के संबोधन में भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भारत पिछले साल जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। भारत से आगे अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं।

इस तरह 2013 में ‘Fragile Five’ में गिने जाने से लेकर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने तक का सफर भारत की आर्थिक कहानी में बड़ा बदलाव माना जाता है।

‘Fragile Five’ से ‘Viksit Bharat’ तक का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भारत के सामने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य भी दोहराया। उनका जोर बड़े सपने देखने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश की आर्थिक तथा तकनीकी क्षमता को मजबूत करने पर रहा।

यानी लाल किले से ‘Fragile Five’ का जिक्र केवल अतीत की आर्थिक स्थिति बताने तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में हुए आर्थिक बदलाव को सामने रखा और भारत के अगले लक्ष्य के तौर पर विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।