PM मोदी ने ओमान, कुवैत और कतर के शीर्ष नेतृत्व से की बातचीत, हालात पर जताई गहरी चिंता
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भारत की चिंता बढ़ गई है और कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज हो गई है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारीक और कुवैत के क्राउन प्रिंस सबाह अल खालेद अल हामेत से टेलीफोन पर बातचीत की।
वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित देशों में हुए हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कुशलक्षेम पर विस्तार से चर्चा की। पिछले तीन दिनों में प्रधानमंत्री इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन के शीर्ष नेतृत्व से भी संपर्क कर चुके हैं, जिससे स्पष्ट है कि भारत स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
विदेश मंत्रालय का विस्तृत बयान
इसी बीच विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत बयान जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत किसी भी ऐसी घटना की अनदेखी नहीं कर सकता जो वहां रह रहे भारतीयों को प्रभावित करे। भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है, ऐसे में किसी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत ने व्यापारी जहाजों पर हो रहे हमलों का भी कड़ा विरोध किया है। हाल के दिनों में कुछ भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
तेल टैंकर हमले में भारतीय की मौत
ओमान के निकट एक तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है। प्रवक्ता ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने की अपील दोहराता है। उन्होंने कहा कि पहले ही कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, जिस पर भारत गहरा दुख व्यक्त करता है।
दूतावास सक्रिय, सरकार की पैनी नजर
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं। वे नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं और जरूरतमंदों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।
सरकार क्षेत्रीय देशों और प्रमुख भागीदारों के साथ सतत संपर्क में है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अपने समकक्षों से चर्चा कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और राष्ट्रीय हित में आवश्यक कदम उठाती रहेगी।
