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NEET अभ्यर्थी की मौत पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी बोले- ये आत्महत्या नहीं-सिस्टम द्वारा हत्या

 
NEET अभ्यर्थी की मौत पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी बोले- ये आत्महत्या नहीं-सिस्टम द्वारा हत्या
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Lucknow : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में NEET-UG के एक अभ्यर्थी द्वारा कथित आत्महत्या किए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर तीखा हमला बोला है।

बताया जा रहा है कि 21 वर्षीय रितिक मिश्रा ने 14 मई को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार, परीक्षा रद्द होने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में था। यह उसका तीसरा NEET प्रयास था और उसे इस बार सफलता की पूरी उम्मीद थी।

‘यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम द्वारा हत्या’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि,“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा… ये लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के आखिरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा परीक्षा रद्द होते ही टूट गया। गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी। ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा हत्या है।”

परीक्षा घोटालों के आंकड़े किए साझा

कांग्रेस सांसद ने परीक्षा घोटालों को लेकर कई आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 से 2026 तक देश में 148 परीक्षा घोटाले सामने आए, जिनमें 87 परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और करीब 9 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ।

राहुल गांधी ने कहा कि 148 घोटालों में अब तक केवल एक व्यक्ति को सजा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED जांच के बावजूद किसी बड़े आरोपी पर कार्रवाई नहीं हुई।

सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा घोटालों में जिम्मेदार अधिकारियों या मंत्रियों ने इस्तीफा तक नहीं दिया। उन्होंने लिखा कि “चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गंवाते हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा, “मोदी जी, कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?”

पुलिस जांच जारी

पुलिस के मुताबिक, छात्र का कमरा अंदर से बंद मिला था और मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मामले की जांच की जा रही है। इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।