रूस-भारत के बीच सीधा रेल कॉरिडोर बनाने की तैयारी तेज, जानिए क्या होगा संभावित रूट और क्यों है इसकी जरूरत
नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच व्यापारिक और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सीधे रेल संपर्क की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने हाल ही में भारत तक सीधे रेल लिंक की संभावनाओं पर विचार करने की बात कही है। रूस की ओर से इसके लिए संभावित रूट पर भी चर्चा की गई है। यदि यह परियोजना आकार लेती है, तो भारत और रूस के बीच माल परिवहन के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है।
पुतिन पहले ही दे चुके हैं बड़े रेल कॉरिडोर का संकेत
भारत-रूस के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की चर्चा नई नहीं है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी बाल्टिक और बेरेंट्स सागर क्षेत्र को हिंद महासागर से जोड़ने वाले व्यापक परिवहन नेटवर्क की योजना पर जोर दे चुके हैं। इसका उद्देश्य रूस और एशिया के बीच तेज और कम लागत वाला लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार करना है।
अब रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने भारत तक सीधे रेल संपर्क की संभावनाओं को तलाशने की बात कही है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक नए भूमि-आधारित विकल्प को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
अभी किन रास्तों से होता है भारत-रूस व्यापार?
वर्तमान में भारत और रूस के बीच माल परिवहन के लिए कई मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है।
स्वेज नहर मार्ग: रूस से भारत तक समुद्री व्यापार का पारंपरिक मार्ग स्वेज नहर से होकर गुजरता है। जहाज काला सागर और भूमध्य सागर होते हुए स्वेज नहर तथा लाल सागर से भारत के पश्चिमी बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। यह मार्ग लंबा होने के कारण माल पहुंचने में काफी समय लेता है।
इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC): यह भारत, ईरान और रूस को जोड़ने वाला मल्टीमॉडल नेटवर्क है। इसमें भारत से माल समुद्र के रास्ते ईरान के बंदर अब्बास या चाबहार पहुंचता है और फिर रेल एवं सड़क मार्ग से रूस की ओर भेजा जाता है। यह स्वेज मार्ग की तुलना में काफी कम समय ले सकता है।
चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा: यह भारत के पूर्वी तट को रूस के सुदूर पूर्वी बंदरगाह व्लादिवोस्तोक से जोड़ता है। स्वेज नहर को बायपास करने के कारण यह समुद्री दूरी और यात्रा समय कम करने की क्षमता रखता है।
इसके अलावा रूस आर्कटिक क्षेत्र के उत्तरी समुद्री मार्ग को भी विकसित कर रहा है, जिसे भविष्य में भारत-रूस व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हो सकता है नया रेल रूट?
भारत और रूस के बीच सीधे रेल संपर्क के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। एक संभावित भूमि मार्ग रूस से तुर्कमेनिस्तान, ईरान और आगे दक्षिण एशिया की दिशा में जा सकता है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान संबंधों और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सीधे पाकिस्तान के रास्ते रेल संपर्क बनाना बड़ी चुनौती होगा।
एक अन्य विकल्प मौजूदा INSTC नेटवर्क को और मजबूत करने का है। इसमें रूस से रेल के जरिए कजाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान होते हुए ईरान पहुंचा जा सकता है। इसके बाद ईरान के रेल नेटवर्क के जरिए बंदर अब्बास या चाबहार तक माल पहुंचाकर भारत भेजा जा सकता है। भविष्य में इस नेटवर्क को अफगानिस्तान के रास्ते भारत तक भूमि संपर्क से जोड़ने की संभावना भी देखी जा सकती है।
आखिर रेल कॉरिडोर की जरूरत क्यों?
पहली वजह- समुद्री मार्गों का बढ़ता जोखिम। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा और माल परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। वहीं रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण काला सागर और उससे जुड़े समुद्री मार्गों में भी जोखिम बना हुआ है।
ऐसे में जमीन आधारित परिवहन नेटवर्क दोनों देशों को कुछ संवेदनशील समुद्री chokepoints से बचने का विकल्प दे सकता है।
दूसरी वजह- भारत की ऊर्जा जरूरतें। भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में रूस से ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त और अपेक्षाकृत सुरक्षित लॉजिस्टिक्स विकल्प दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
तीसरी वजह- 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। व्यापार बढ़ने के साथ तेज, भरोसेमंद और कम लागत वाले परिवहन नेटवर्क की जरूरत भी बढ़ेगी।
रेलवे क्षेत्र में पहले से बढ़ रहा सहयोग
भारत और रूस के बीच रेलवे क्षेत्र में पहले से ही सहयोग चल रहा है। रूसी कंपनी Transmashholding (TMH) भारत में वंदे भारत स्लीपर कोचों के निर्माण और रखरखाव से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट में शामिल है। दोनों देश रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और सिग्नलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं।
क्या यह रेल लाइन जल्द बन जाएगी?
फिलहाल भारत-रूस के बीच पूरी तरह सीधा रेल मार्ग एक प्रस्ताव और संभावनाओं के स्तर पर है। इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें कई देशों से होकर गुजरने वाले मार्ग, अलग-अलग देशों के रेलवे नेटवर्क और गेज, सीमा शुल्क, सुरक्षा, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और भारी निवेश शामिल हैं।
