Quad Meeting 2026: भारत की तारीफ, चीन की व्यापार नीतियों पर चिंता; जयशंकर ने बताई क्वाड की प्राथमिकताएं
अमेरिका के अटलांटा में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के राहत प्रयासों की सराहना की गई। बैठक में चीन का नाम लिए बिना व्यापार नीतियों पर चिंता जताई गई। होर्मुज, लाल सागर और हिंद-प्रशांत की समुद्री सुरक्षा पर भी चर्चा हुई।
अमेरिका के अटलांटा में शनिवार को हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में भारत की भूमिका की सराहना की गई। बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए। इस दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क्वाड देशों ने नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे पहले सहायता पहुंचाने में भारत के योगदान को स्वीकार किया। इसके साथ ही चारों देशों की ओर से नेपाल को दिए गए सहयोग की भी सराहना की गई।
नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत की मदद की सराहना
क्वाड देशों ने संयुक्त बयान में नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान में भारत की सक्रिय भूमिका की तारीफ की। भारत ने इस दौरान राहत कार्यों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही नेपाल को वित्तीय सहायता भी दी गई थी।
बैठक में चारों देशों ने नेपाल को मिले सहयोग को भी सराहा। आपदा के बाद भारत की ओर से सबसे पहले सहायता पहुंचाने की भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
चीन का नाम लिए बिना व्यापार नीतियों पर जताई चिंता
बैठक में क्वाड देशों ने किसी देश का नाम लिए बिना आर्थिक दबाव बनाने वाली नीतियों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहे उनके प्रभाव को लेकर चिंता जताई। संयुक्त बयान में कहा गया कि मनमाने तरीके से निर्यात पर प्रतिबंध लगाना और बाजार के सामान्य नियमों के खिलाफ नीतियां अपनाना वैश्विक सप्लाई चेन को नुकसान पहुंचा रहा है।
बयान में महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और ऐसी व्यापारिक नीतियों का भी उल्लेख किया गया, जिनसे वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है। क्वाड देशों ने आर्थिक सुरक्षा को वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए जरूरी बताया। साथ ही भरोसेमंद और खुली सप्लाई चेन तथा मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई।
होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
संयुक्त बयान में कहा गया कि इन समुद्री रास्तों से व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति जारी रहना जरूरी है। जहाजों और उन पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। क्वाड ने इन मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाए बिना आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की बात कही।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून यानी UNCLOS के तहत नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
जयशंकर बोले- हिंद-प्रशांत में स्थिरता और समृद्धि जरूरी
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के साथ सभी देशों को अपनी पसंद के फैसले लेने की आजादी देने के महत्व को दोहराया है।
उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया। जयशंकर ने आतंकवाद से मुकाबले, समुद्री सुरक्षा और देशों की क्षमता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत भी बताई। उनके मुताबिक, इन प्रयासों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूती मिलेगी।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर दी बैठक की जानकारी
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि अटलांटा में हुई यह इस साल क्वाड विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है।
उन्होंने लिखा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और देशों को अपनी पसंद के फैसले लेने की स्वतंत्रता देना क्वाड के प्रयासों का हिस्सा है। जयशंकर ने सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों को भी अहम बताया।
G20 बैठक में भी समुद्री हमलों का मुद्दा उठा चुके हैं जयशंकर
क्वाड बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को एस. जयशंकर ने G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में नागरिक जहाजों और उनके कर्मचारियों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा था कि समुद्री रास्तों पर हमलों से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है। जयशंकर ने यह भी कहा था कि इन हमलों का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है। इससे ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
