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अयोध्या में रामलला का तीसरा जन्मोत्सव, इतने बजे होगा 5 मिनट का दिव्य सूर्य तिलक

अयोध्या में रामलला का तीसरा जन्मोत्सव भव्य रूप से मनाया जा रहा है। ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। दर्शन का समय बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक किया गया है। दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक का दिव्य दृश्य आकर्षण का केंद्र रहेगा।

 
रामलला का तीसरा जन्मोत्सव
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अयोध्या: आस्था और श्रद्धा के केंद्र राम मंदिर अयोध्या में भगवान रामलला का तीसरा जन्मोत्सव इस बार अत्यंत भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक रूप में मनाया जा रहा है। पूरे रामनगरी में उत्सव का माहौल है और देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। जन्मोत्सव से एक दिन पहले ही करीब ढाई लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं, जिससे पूरा शहर राममय हो गया है।

दर्शन का समय बढ़ाया गया

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए दर्शन की अवधि में करीब तीन घंटे की बढ़ोतरी की है।

अब भक्तों को सुबह 5 बजे से ही प्रवेश मिलना शुरू हो जाएगा, जबकि मंदिर के कपाट रात्रि 11 बजे तक खुले रहेंगे। इस फैसले से लाखों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।

दोपहर 12 बजे होगा अद्भुत ‘सूर्य तिलक’

जन्मोत्सव का सबसे विशेष आकर्षण दोपहर 12 बजे होने वाला सूर्य तिलक होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सूर्य की किरणें करीब 5 मिनट तक रामलला के ललाट का अभिषेक करेंगी।

इस अनूठी व्यवस्था का सफल परीक्षण पहले ही किया जा चुका है, जिससे यह क्षण भक्तों के लिए अत्यंत अलौकिक और भावनात्मक होने वाला है।

पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा और रूट डायवर्जन लागू

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अयोध्या में रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है। चारपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रूप से बनी रहे।
सरयू घाट, राम की पैड़ी, कनक भवन और हनुमानगढ़ी जैसे प्रमुख स्थलों पर बैरीकेडिंग कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं को गर्मी और धूप से बचाने के लिए पूरे रामजन्मभूमि परिसर और दर्शन मार्ग पर कालीन बिछाई गई है। इसके अलावा रामपथ, भक्तिपथ और धर्मपथ पर भी मैटिंग की गई है।
पेयजल, चिकित्सा, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी व्यापक इंतजाम किया गया है। मुख्य प्रवेश द्वार और अंगद टीला क्षेत्र में बड़े-बड़े पंडाल बनाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

रामनगरी में चरम पर पहुंचेगा उत्सव का उल्लास

चैत्र शुक्ल नवमी, संवत 2083 यानी 27 मार्च को दोपहर 12 बजे जैसे ही भगवान रामलला का जन्म होगा, वैसे ही पूरे अयोध्या में उल्लास अपने चरम पर होगा।