अयोध्या: राम मंदिर के शिखर पर फहराई 22 फीट ऊंची धर्मध्वजा, PM मोदी बोले- राम भेद नहीं भाव से जोड़ते
अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर 22 फीट ऊंचा धर्मध्वज फहराया। वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य समारोह के बीच PM ने कहा कि राम भेद नहीं, भाव से जोड़ते हैं। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का आह्वान भी किया।
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मंगलवार को देश ने एक और ऐतिहासिक क्षण देखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहराया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भक्ति के स्वर के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने रामनगरी को भव्य उत्सव में बदल दिया। श्रद्धालुओं, संतों और नागरिकों के चेहरों पर भावनाओं की जो चमक दिखी, वह इस गौरवशाली क्षण की गवाही दे रही थी।
22 फीट ऊंचा धर्मध्वज बना सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक
धर्मध्वज लगभग 22 फीट ऊंचा और 11 फीट चौड़ा है, जिस पर सूर्यवंश का प्रतीक, कोविदार वृक्ष और ‘ॐ’ अंकित है। इसे आधुनिक इलेक्ट्रिक सिस्टम से आरोहित किया गया। यह ध्वज न केवल मंदिर निर्माण की सफलता का संकेत है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और गौरव का जीवंत प्रतीक भी माना जा रहा है।
रामनगरी में उत्सव का माहौल
अयोध्या की सड़कों पर सुबह से ही जय-जयकार की गूंज सुनाई देने लगी थी। सात सांस्कृतिक मंचों पर लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और divine बना दिया। हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और नागरिक इस क्षण के प्रत्यक्ष साक्षी बने। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजामों के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।
राम भाव से जोड़ते हैं, भेद से नहीं - PM मोदी
ध्वजारोहण के बाद संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- हम सब जानते हैं कि राम भेद से नहीं, भाव से जोड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, भक्ति और आचरण महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में सरकार का प्रयास रहा है कि देश के प्रत्येक वर्ग- महिलाएं, किसान, श्रमिक, दलित, पिछड़े, आदिवासी और युवा को विकास की मुख्यधारा में स्थान मिले।
प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का भी आह्वान किया और कहा कि यह लक्ष्य सामूहिक शक्ति और सामूहिक प्रयास से ही पूरा होगा।
राम जीवन, मर्यादा और सदाचार का नाम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- राम केवल एक देवता नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का सर्वोच्च मानक हैं। हमें उनके चरित्र और मर्यादा से सीखकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
सप्त मंदिरों से झलका सामूहिक श्रद्धा का भाव
उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर परिसर में सप्त मंदिर स्थापित किए गए हैं, जिनमें- माता शबरी, निषादराज, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, संत तुलसीदास के मंदिर शामिल हैं।
जटायु और गिलहरी की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं, जो यह संदेश देती हैं कि बड़े संकल्प के लिए छोटे-से-छोटे योगदान भी महत्वपूर्ण होते हैं।
धर्मध्वज जीवन के आदर्शों का प्रेरणा स्तंभ
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मध्वज देश को प्रेरित करेगा- प्राण जाए, पर वचन न जाए और यह कर्मप्रधान राष्ट्र निर्माण का संदेश देता रहेगा। उन्होंने कहा कि धर्मध्वज शांति, सौहार्द, सामाजिक सुख और समाज से भेदभाव मिटाने की कामना का प्रतीक है।
देश ने देखा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्ण अध्याय
अयोध्या में फहराया गया यह धर्मध्वज मंदिर निर्माण की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आत्मगौरव के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज होने वाला क्षण बन गया है।
