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मिडिल ईस्ट में तनाव कम होते ही राहत, सरकार ने कमर्शियल LPG सप्लाई पर हटाई पाबंदियां

 
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मध्य पूर्व में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद भारत सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नॉन-डोमेस्टिक (कमर्शियल) पैक्ड LPG की सप्लाई पर लगाई गई सभी पाबंदियों को हटा दिया है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, छोटे उद्योगों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान एलपीजी सप्लाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल पैक्ड LPG की आपूर्ति सीमित कर दी गई थी।

अब संकट से पहले के स्तर पर होगी सप्लाई

मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में हालात सामान्य होने और समुद्री परिवहन में सुधार के बाद कमर्शियल LPG की आपूर्ति पर लगाई गई सभी सेक्टोरल पाबंदियां समाप्त कर दी गई हैं। अब नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल किया जाएगा।

इसके साथ ही बल्क LPG की आपूर्ति पर लागू प्रतिबंधों में भी राहत दी गई है। सरकार ने बल्क LPG उपभोक्ताओं को संकट से पहले के उपभोग स्तर के 50 प्रतिशत तक आपूर्ति की अनुमति देने का फैसला किया है।

 होर्मुज जलडमरूमध्य का बड़ा महत्व

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी, जिससे भारत समेत कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एहतियाती कदम उठाए थे।

अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा समुद्री मार्गों पर स्थिति सामान्य होने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी कम हुई हैं।

कारोबारियों को मिलेगी राहत

सरकार के इस फैसले से होटल, रेस्तरां, कैटरिंग व्यवसाय, उद्योगों और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। कमर्शियल LPG की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में सप्लाई सामान्य होगी और संचालन प्रभावित होने की आशंका भी कम हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति स्थिर बनी रहती है, तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव भी कम हो सकता है, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों को फायदा मिलेगा।