RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- लोकतंत्र में आंदोलन का भी है स्थान
New Delhi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने Gen-Z से संवाद कार्यक्रम में लोकतंत्र, आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यदि किसी की आवाज़ नहीं सुनी जाती है तो आंदोलन करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में आम सहमति बनाना होना चाहिए, न कि विभाजन पैदा करना।
मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है। अलग-अलग विचार सामने आते हैं और संवाद के माध्यम से समाधान निकलता है। यदि किसी कारण से बात नहीं सुनी जाती तो आंदोलन किया जा सकता है, लेकिन वह समाज को जोड़ने के लिए होना चाहिए, तोड़ने के लिए नहीं।
'Gen-Z की शिकायत सही है'
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हाल के समय में Gen-Z द्वारा शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवाल उचित हैं। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है और इसी कारण युवा अपनी बात मुखर होकर रख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब हम उनकी उम्र के थे, तब बड़े जो कहते थे, उसे मान लेते थे। आज की Gen-Z और Gen Alpha सवाल पूछती है। उन्हें तार्किक जवाब और सम्मान चाहिए। लोकतंत्र में यही स्वस्थ परंपरा है।
'डिबेट नहीं, शास्त्रार्थ की संस्कृति'
मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में संवाद को 'शास्त्रार्थ' कहा जाता है, जहां अलग-अलग विचारों के माध्यम से सत्य तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि समाज में विभिन्न विचार और विरोधी विचार मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, इसलिए मतभेदों का सम्मान होना चाहिए।
संविधान की मर्यादा में हो विरोध
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि वह यह नहीं कहते कि Gen-Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध के भी अपने नियम और तरीके हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं, विशेषकर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादाओं को स्पष्ट किया है, जिनका पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से संवाद, तर्क और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी बात रखने का आग्रह किया।
