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कांग्रेस के पुराने मुख्यालय पर RTI से बड़ा खुलासा, 13 साल से बिना किराया 24 अकबर रोड पर कब्जा!

RTI से सामने आई जानकारी के अनुसार कांग्रेस का पुराना मुख्यालय 24 अकबर रोड वर्ष 2013 से अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पार्टी ने 13 वर्षों से किराया नहीं चुकाया। मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

 
Congress 24 Akbar Road
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Congress 24 Akbar Road: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई एक रिपोर्ट ने कांग्रेस के पुराने राष्ट्रीय मुख्यालय 24 अकबर रोड को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। RTI से मिली जानकारी के अनुसार, यह सरकारी बंगला वर्ष 2013 से ‘अनधिकृत कब्जे’ की श्रेणी में दर्ज है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कांग्रेस ने इस अवधि के दौरान भवन का किराया जमा नहीं किया है और बकाया राशि का आकलन अभी भी सरकारी स्तर पर लंबित है।

2013 में रद्द हुआ था आवंटन

RTI में उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, कांग्रेस को पार्टी कार्यालय निर्माण के लिए अलग भूमि आवंटित किए जाने के बाद पुराने सरकारी आवास खाली करने थे। इसी क्रम में 24 अकबर रोड सहित कुछ सरकारी परिसरों का आवंटन वर्ष 2013 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद यह परिसर अब तक कांग्रेस के कब्जे में बना हुआ है।

नया मुख्यालय बनने के बाद भी नहीं छोड़ा पुराना परिसर

कांग्रेस ने अपना नया राष्ट्रीय मुख्यालय इंदिरा भवन में स्थानांतरित कर लिया है, लेकिन 24 अकबर रोड का ऐतिहासिक परिसर अभी पूरी तरह खाली नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी केंद्र सरकार की ओर से पार्टी को परिसर खाली करने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

किराये का हिसाब अभी तय नहीं

RTI के अनुसार, सरकार को 2013 के बाद से इस परिसर का नियमित किराया प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, संबंधित विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बकाया राशि की अंतिम गणना और समीक्षा की प्रक्रिया अभी जारी है। इसलिए देय राशि पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

पहले भी जारी हो चुके हैं बेदखली नोटिस

मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने कांग्रेस को 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड स्थित परिसरों को खाली करने का नोटिस जारी किया था। उस समय कांग्रेस ने कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही थी और परिसर को पार्टी की ऐतिहासिक विरासत बताया था।

सियासत तेज होने के आसार

RTI के इस खुलासे के बाद एक बार फिर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज होने की संभावना है। एक ओर सरकारी रिकॉर्ड में परिसर को अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में बताया गया है, वहीं कांग्रेस पहले भी इस कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताती रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।