Union Budget 2026 से ठीक पहले रुपया धराशायी, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92 पर पहुंचा
नई दिल्ली I बजट से ठीक पहले भारतीय रुपए में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। गुरुवार को अंतरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 91.98-92.00 के आसपास पहुंच गया, जो इसका ऐतिहासिक रिकॉर्ड लो है। यह पिछले रिकॉर्ड लो 91.9650 को भी पार कर गया।
ट्रेडर्स के अनुसार, विदेशी पूंजी के निरंतर बहाव में कमी, इंपोर्टर्स की हेजिंग की होड़, कमजोर घरेलू शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपए पर दबाव बढ़ाया। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और ग्लोबल डॉलर की मजबूती ने भी स्थिति को और खराब किया।
इस साल अब तक रुपए में लगभग 2% की गिरावट आ चुकी है, जबकि अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट पर लगाए गए भारी टैरिफ के बाद से इसमें करीब 5% की कमी आई है। यह सब तब हो रहा है जब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2% रही है।
इंटरबैंक मार्केट में रुपया 91.45 पर खुला, लेकिन जल्द ही 91.41 के इंट्राडे हाई के बाद गिरावट शुरू हो गई। दिन के दौरान यह 92.00 के इंट्राडे लो पर पहुंचा और अंत में 91.88 (अस्थायी) के आसपास बंद हुआ, जो पिछले बंद से 30 पैसे कम है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने संभवतः शुरुआती घंटों में हस्तक्षेप किया ताकि गिरावट को नियंत्रित किया जा सके, खासकर मनोवैज्ञानिक स्तर 92 के करीब पहुंचने पर। आरबीआई का रुख स्पष्ट है कि वह किसी खास स्तर या बैंड को टारगेट नहीं करता, बल्कि अत्यधिक अस्थिरता रोकने के लिए ही दखल देता है।
आगे की भविष्यवाणी: गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अमेरिकी टैरिफ में अंततः कमी आएगी, लेकिन फिलहाल देरी से बाहरी बैलेंस पर दबाव बनेगा। फर्म को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में रुपया गिरकर 94 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
ट्रेडर्स का मानना है कि यदि विदेशी पूंजी बहाव में सुधार नहीं हुआ और ग्लोबल फैक्टर्स अनुकूल नहीं हुए, तो रुपए पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, मजबूत घरेलू ग्रोथ और आरबीआई के संतुलित हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित करने की उम्मीद है।
