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रूस का बड़ा प्रतिनिधिमंडल 4-5 दिसंबर को भारत दौरे पर,रक्षा और आर्थिक मामलों पर होंगे अहम वार्ता

New Delhi : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव समेत शीर्ष प्रतिनिधिमंडल 4–5 दिसंबर को भारत दौरे पर रहेगा। दोनों देशों के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग पर अहम वार्ता होगी। एस-400 मिसाइल सिस्टम, सु-57 फाइटर जेट और परमाणु पनडुब्बी जैसी परियोजनाओं पर भी चर्चा तय है।

 
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New Delhi : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट कंपनी के अधिकारी 4 और 5 दिसंबर को भारत का दौरा करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल भारत और रूस के बीच रक्षा एवं आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण चर्चा करेगा। भारत द्वारा आयात किए जाने वाले हथियारों में रूस की हिस्सेदारी करीब 38 प्रतिशत है।

सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के समकक्ष से अलग बैठक करेंगे। यह मुलाकात दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में होगी। इस दौरान आंद्रे बेलौसोव को साउथ ब्लॉक लॉन पर भारत की थलसेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त टुकड़ी सलामी देगी।

बेलौसोव: पुतिन के भरोसेमंद सलाहकार

आंद्रे बेलौसोव एक अर्थशास्त्री हैं और 2024 में रूस की पांचवी बार सत्ता संभालने के बाद पुतिन ने उन्हें रक्षा मंत्रालय का जिम्मा सौंपा था। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की आर्थिक स्थिरता में बेलौसोव का अहम योगदान माना जाता है। पुतिन ने इस भरोसेमंद अधिकारी को भारत दौरे में अपने साथ रखा है, ताकि रक्षा और आर्थिक मामलों पर सीधे वार्ता हो सके।

भारत-रूस रक्षा संबंधों में मजबूती

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है। एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेलौसोव से चिंता जताई है। इसके अलावा, भारत को रूस से एस-400 की 300 अतिरिक्त मिसाइल की जरूरत है।

रूस के मीडिया सलाहकार दिमित्री पेसकोव भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे। उन्होंने हाल ही में भारतीय पत्रकारों को रुसी स्टील्थ फाइटर जेट सु-57 देने की पेशकश की थी। इसके अलावा, भारत और रूस के बीच परमाणु पनडुब्बी की डिलीवरी को लेकर भी चर्चा हो सकती है, जिसे रूस 2028 तक देने का इच्छुक है, जबकि भारत इसे 2027 तक चाहता है।

प्रतिनिधिमंडल के दौरे से भारत-रूस के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है।