संघ की बड़ी चुनौती हिंदू समाज, मंदिरों की कमाई पारदर्शी ढंग से जनहित में खर्च हो: मोहन भागवत
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि देश के मंदिरों की आय का बड़ा हिस्सा जनकल्याण के कार्यों में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन की बागडोर सरकार के बजाय जिम्मेदार और सजग भक्तों के हाथों में होनी चाहिए।
वे संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन एक प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्धजनों के सवालों के जवाब भी दिए।
एक प्रश्न के उत्तर में भागवत ने कहा कि संघ की सबसे बड़ी चुनौती हिंदू समाज को जागृत करना है। उन्होंने कहा, “हमें समाज को संगठित और जागरूक करने के लिए निरंतर मेहनत करनी पड़ती है।”
मंदिरों की आय और उनके प्रबंधन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रमुख मंदिरों के संचालन और आय के उपयोग की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और ईमानदार संस्था की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि संघ इस दिशा में तैयारी कर रहा है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
‘सरकार हम चला रहे, यह भ्रम’
कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि यह धारणा गलत है कि भाजपा सरकार को संघ संचालित करता है। उन्होंने कहा, “हमारे पास कोई रिमोट कंट्रोल नहीं है। सरकार चलाना बेहद कठिन कार्य है। हम अपना काम करते हैं और केवल सुझाव दे सकते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का विरोध करने वाले लोग संघ को भी निशाना बनाते हैं, लेकिन सत्ता में बैठे कई लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ अवसरवादी लोग संघ में शामिल हो जाते हैं, लेकिन संघ की कार्यपद्धति ऐसी है कि वहां समर्पण के अलावा कुछ नहीं मिलता। “संघ देश के उत्थान के लिए समर्पित कार्यकर्ता से केवल लेता है, देता कुछ नहीं। इसलिए अवसरवादी लोग ज्यादा दिन टिक नहीं पाते।
