कौन थीं सरला भट? जिस हत्याकांड ने कश्मीरी पंडितों में फैला दी थी दहशत, 35 साल बाद बड़ा खुलासा
Sarla Bhat Murder Case: करीब साढ़े तीन दशक तक न्याय का इंतजार करने वाले सरला भट हत्याकांड में अब बड़ा कानूनी मोड़ आया है। जम्मू-कश्मीर स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण और हत्या मामले में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन कमांडर यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय में भय का माहौल पैदा करने की सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी।
35 साल बाद जांच में क्यों आया बड़ा मोड़?
SIA के अनुसार, इतने वर्षों तक मामले की जांच आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि आतंक के माहौल में गवाह सामने आने से डरते रहे। वर्ष 2024 में मामला SIA को सौंपे जाने के बाद जांच दोबारा शुरू की गई। एजेंसी ने पुराने दस्तावेजों की दोबारा जांच की, नए गवाहों के बयान दर्ज किए और फोरेंसिक, बैलिस्टिक, मेडिकल तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एकत्र कर पूरे घटनाक्रम को दोबारा तैयार किया।
चार्जशीट में किन लोगों के नाम?
SIA की चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुरशीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार इनमें से तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि खुरशीद अहमद चाल्कू फरार है और उसके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में छिपे होने की आशंका जताई गई है। यासीन मलिक फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक अन्य आतंकी फंडिंग मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
चार्जशीट में किन सबूतों का दावा?
जांच एजेंसी का कहना है कि चार्जशीट केवल गवाहों के बयानों पर आधारित नहीं है। इसमें संरक्षित गवाहों की गवाही, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक और बैलिस्टिक साक्ष्य, घटनास्थल से बरामद JKLF के दावे से जुड़ा दस्तावेज और पूर्व आतंकी बिट्टा कराटे के एक प्रमाणित टीवी इंटरव्यू को भी साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। एजेंसी का दावा है कि इन सभी साक्ष्यों से अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत होता है।
कौन थीं सरला भट?
सरला भट कश्मीर की रहने वाली एक कश्मीरी पंडित नर्स थीं और श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में कार्यरत थीं। अप्रैल 1990 में उन्हें अस्पताल के पास से अगवा कर लिया गया था। अगले दिन उनका शव बरामद हुआ, जिस पर गंभीर चोटों और गोली लगने के निशान मिले थे। उस दौर में घाटी में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के बीच यह घटना कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सबसे भयावह घटनाओं में से एक मानी जाती है।
कश्मीरी पंडितों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
SIA का कहना है कि सरला भट की हत्या किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम नहीं थी, बल्कि घाटी में कश्मीरी पंडितों के बीच भय फैलाने और उनके पलायन को तेज करने की व्यापक आतंकी रणनीति का हिस्सा थी। एजेंसी के अनुसार यह चार्जशीट केवल एक पुराने केस में कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि दशकों पुराने आतंकवादी अपराधों में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अब आगे क्या होगा?
737 पन्नों की चार्जशीट श्रीनगर की विशेष अदालत में दाखिल की जा चुकी है। अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगी। करीब 35 साल बाद इस केस में हुई यह कार्रवाई उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण मानी जा रही है, जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
