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सिक्किम बना देश की पहली पेपरलेस न्यायपालिका, CJI सूर्यकांत ने बताया ऐतिहासिक कदम
 

 
 सिक्किम बना देश की पहली पेपरलेस न्यायपालिका, CJI सूर्यकांत ने बताया ऐतिहासिक कदम
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गंगटोक। भारत की न्यायिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए सिक्किम को देश की पहली पेपरलेस न्यायपालिका घोषित किया गया है। यह घोषणा भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गंगटोक स्थित चिंतन भवन में आयोजित राष्ट्रीय तकनीक और न्यायिक शिक्षा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में की।

यह दो दिवसीय सम्मेलन सिक्किम उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के न्यायिक विशेषज्ञों, न्यायाधीशों और विधि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रणाली में तकनीक की भूमिका को मजबूत करना और कानूनी शिक्षा को आधुनिक स्वरूप देना रहा।

अपने संबोधन में सीजेआई ने कहा कि सिक्किम का पेपरलेस न्यायपालिका बनना सिर्फ एक राज्य की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक नई दिशा है। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक के जरिए अब केस दाखिल करने से लेकर सुनवाई तक की प्रक्रिया आसान हो गई है, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली अब पारंपरिक कागजी ढांचे से आगे बढ़कर डिजिटल व्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर है। ई-कोर्ट्स परियोजना के तहत अदालतों का कामकाज ऑनलाइन हो रहा है, जिससे पारदर्शिता और कार्यक्षमता दोनों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) को इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे मामलों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाती है और आम लोग अपने केस की स्थिति आसानी से देख सकते हैं।

सीजेआई ने बताया कि एसयूवीएएस (अनुवाद प्रणाली) और एसयूपीएसीई (एआई आधारित कानूनी सहायक) जैसे आधुनिक उपकरण न्यायाधीशों के कार्य को और अधिक सरल और प्रभावी बना रहे हैं। अब दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी ऑनलाइन माध्यम से अपने केस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, आदेश देख सकते हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी कई सुधारों की आवश्यकता है। सभी अदालतों में समान डिजिटल प्रणाली लागू करना और ई-सेवा केंद्रों का विस्तार करना जरूरी है, ताकि डिजिटल जानकारी की कमी वाले लोग भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायिक शिक्षा में तकनीक के समावेश पर भी जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल बुनियादी डिजिटल ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई तकनीकों के उपयोग और उनके नैतिक पहलुओं को भी समझना आवश्यक है।

इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई न्यायिक अधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें सेशेल्स के मुख्य न्यायाधीश और श्रीलंका के सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश भी मौजूद रहे।