13वें दिन भी अनशन पर डटे सोनम वांगचुक: 7.5 किलो वजन घटा, बोले- हक की लड़ाई जारी रहेगी
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का आमरण अनशन लगातार जारी है। अनशन के 13वें दिन उनका वजन करीब 7.5 किलोग्राम घट चुका है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रतिबद्धता और हौसले में कोई कमी नहीं आई है।
'शरीर कमजोर हुआ, लेकिन संकल्प पहले जैसा मजबूत'
अनशन के दौरान अपनी सेहत पर बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि लगातार उपवास के कारण शरीर पर असर जरूर पड़ा है और अब हड्डियां भी दिखाई देने लगी हैं, लेकिन मानसिक रूप से वह पहले की तरह मजबूत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब शरीर ने भूख के साथ खुद को काफी हद तक संतुलित कर लिया है और वह अभी भी ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं।
परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के उस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के मामलों और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।
शांतिपूर्ण विरोध को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनेगी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होगी।
लगातार बढ़ रही स्वास्थ्य संबंधी चिंता
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की वजह से उनके वजन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। हालांकि चिकित्सकों की निगरानी लगातार जारी है और समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। समर्थकों ने भी सरकार से अपील की है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए।
20 दिनों से जारी है प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कई दिनों से जारी है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सोनम वांगचुक के अनशन से इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान मिला है, जबकि प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग पर कायम हैं।
