स्पैम कॉल और फ्रॉड मैसेज पर लगेगी लगाम! अब ठगों की खैर नहीं, TRAI ने लागू किए नए सख्त नियम
Mar 4, 2026, 15:31 IST
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स्पैम कॉल और फ्रॉड मैसेज पर लगगी लगाम! अब ठगों की खैर नहीं, TRAI ने लागू किए नए सख्त नियम देश में लगातार बढ़ रही स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या पर लगाम लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी संदिग्ध मोबाइल नंबर की पहचान होने पर कार्रवाई में देरी की गुंजाइश नहीं रहेगी।
27 फरवरी को जारी आदेश में सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग प्रणाली को और मजबूत बनाएं तथा संदिग्ध गतिविधि सामने आते ही तत्काल कदम उठाएं। सरकार का उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी पर तेज और प्रभावी रोक लगाना है।
2 घंटे में साझा करनी होगी जानकारी
नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी कंपनी की एआई प्रणाली किसी मोबाइल नंबर को संदिग्ध के रूप में चिन्हित करती है तो उस जानकारी को अधिकतम दो घंटे के भीतर अन्य संबंधित ऑपरेटरों के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया ब्लॉकचेन आधारित डीएलटी (Distributed Ledger Technology) प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी, जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित और पारदर्शी रहेगा।
इस व्यवस्था से शिकायत का इंतजार किए बिना ही संदिग्ध नंबरों पर निगरानी शुरू हो सकेगी। साथ ही, ऐसे मामलों में टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई भी करनी होगी।
कॉल करने और रिसीव करने वाले दोनों ऑपरेटर जिम्मेदार
अब सिर्फ एक कंपनी पर जिम्मेदारी नहीं होगी। जिस नेटवर्क से कॉल की गई और जिस नेटवर्क पर कॉल प्राप्त हुई, दोनों ऑपरेटरों को मिलकर कार्रवाई करनी होगी। एआई सिस्टम कॉल लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) स्तर पर ही संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित करेगा, जिससे फर्जी कॉलर्स की पहचान करना आसान होगा।
बार-बार शिकायत पर नंबर होगा ब्लॉक
यदि किसी मोबाइल नंबर के खिलाफ 10 दिनों के भीतर पांच या उससे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं, तो संबंधित ऑपरेटर को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ऐसे नंबर को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। यह कदम खासतौर पर यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक मैसेज, लोन ऑफर और नकली केवाईसी अपडेट जैसी ठगी को रोकने के लिए उठाया गया है।
मोबाइल यूजर्स को मिलेगी राहत
भारत में एक अरब से अधिक मोबाइल उपभोक्ता हैं और बड़ी संख्या में लोग स्पैम कॉल व धोखाधड़ी वाले संदेशों से परेशान रहे हैं। कई उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग से जुड़ी ठगी का शिकार भी हुए हैं।
नए नियम लागू होने के बाद उम्मीद है कि एआई आधारित निगरानी और त्वरित कार्रवाई से डिजिटल फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी। इससे आम उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद टेलीकॉम सेवाएं मिल सकेंगी।
27 फरवरी को जारी आदेश में सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग प्रणाली को और मजबूत बनाएं तथा संदिग्ध गतिविधि सामने आते ही तत्काल कदम उठाएं। सरकार का उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी पर तेज और प्रभावी रोक लगाना है।
2 घंटे में साझा करनी होगी जानकारी
नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी कंपनी की एआई प्रणाली किसी मोबाइल नंबर को संदिग्ध के रूप में चिन्हित करती है तो उस जानकारी को अधिकतम दो घंटे के भीतर अन्य संबंधित ऑपरेटरों के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया ब्लॉकचेन आधारित डीएलटी (Distributed Ledger Technology) प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी, जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित और पारदर्शी रहेगा।
इस व्यवस्था से शिकायत का इंतजार किए बिना ही संदिग्ध नंबरों पर निगरानी शुरू हो सकेगी। साथ ही, ऐसे मामलों में टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई भी करनी होगी।
कॉल करने और रिसीव करने वाले दोनों ऑपरेटर जिम्मेदार
अब सिर्फ एक कंपनी पर जिम्मेदारी नहीं होगी। जिस नेटवर्क से कॉल की गई और जिस नेटवर्क पर कॉल प्राप्त हुई, दोनों ऑपरेटरों को मिलकर कार्रवाई करनी होगी। एआई सिस्टम कॉल लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) स्तर पर ही संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित करेगा, जिससे फर्जी कॉलर्स की पहचान करना आसान होगा।
बार-बार शिकायत पर नंबर होगा ब्लॉक
यदि किसी मोबाइल नंबर के खिलाफ 10 दिनों के भीतर पांच या उससे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं, तो संबंधित ऑपरेटर को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ऐसे नंबर को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। यह कदम खासतौर पर यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक मैसेज, लोन ऑफर और नकली केवाईसी अपडेट जैसी ठगी को रोकने के लिए उठाया गया है।
मोबाइल यूजर्स को मिलेगी राहत
भारत में एक अरब से अधिक मोबाइल उपभोक्ता हैं और बड़ी संख्या में लोग स्पैम कॉल व धोखाधड़ी वाले संदेशों से परेशान रहे हैं। कई उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग से जुड़ी ठगी का शिकार भी हुए हैं।
नए नियम लागू होने के बाद उम्मीद है कि एआई आधारित निगरानी और त्वरित कार्रवाई से डिजिटल फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी। इससे आम उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद टेलीकॉम सेवाएं मिल सकेंगी।
