सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गोद लेने वाली मां को भी मिलेगा 12 हफ्ता का पूरा मातृत्व अवकाश
सुप्रीम कोर्ट ने दत्तक माताओं को बड़ी राहत देते हुए फैसला सुनाया कि बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, सभी को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। कोर्ट ने उम्र आधारित भेदभाव को असंवैधानिक ठहराया और केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश पर भी विचार करने का सुझाव दिया।
SC Verdict Maternity Leave : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करते हुए गोद लेने वाली माताओं को बड़ा राहत दी है। अदालत ने कहा कि बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, सभी दत्तक माताओं को गोद लेने की तारीख से 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले लागू प्रावधान, जिसमें केवल तीन महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को ही यह सुविधा दी जाती थी, भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है।
बेंच ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट की बेंच ने कहा कि ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020’ की धारा 60(4) के तहत उम्र के आधार पर किया गया वर्गीकरण अनुचित है। अदालत ने जोर देकर कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बच्चा परिवार में कैसे आया है। जैविक और दत्तक मां के बीच कोई भेद नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रजनन की आज़ादी का अधिकार केवल जैविक जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गोद लेना भी शामिल है और यह माता-पिता होने की संवैधानिक समझ का हिस्सा है।
पितृत्व अवकाश पर भी सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) को सामाजिक कल्याण उपाय के रूप में लागू करने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने देखभाल के मामलों में अधिक लिंग-तटस्थ और समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
बच्चे के हित को बताया सर्वोपरि
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चे का सर्वोत्तम हित सबसे महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से बड़े बच्चों को नए परिवार में ढलने और भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है, इसलिए मातृत्व अवकाश उनके हित में जरूरी है।
याचिका पर आया फैसला
यह फैसला कर्नाटक की वकील हमसानंदिनी नंदुरी द्वारा दायर याचिका पर आया है। उन्होंने उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जो पहले मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 और बाद में 2020 के कोड में शामिल था। याचिका में इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया गया था। उनकी ओर से वकील बानी दीक्षित ने पैरवी की थी।
