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सुप्रीम कोर्ट: SIR में किसी भी रुकावट को बर्दाश्त नहीं, ममता की याचिका पर स्पष्ट संदेश
 

 
 सुप्रीम कोर्ट: SIR में किसी भी रुकावट को बर्दाश्त नहीं, ममता की याचिका पर स्पष्ट संदेश
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नई दिल्ली I सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट या बाधा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, "हम SIR प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आने देंगे। यह सभी राज्यों को स्पष्ट रूप से समझना होगा।" अदालत ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है।

कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे SIR प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करें और इसमें कोई अवरोध न डालें। पीठ ने कहा कि आवश्यकतानुसार कोई भी आदेश या स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल मामले में समय-सीमा बढ़ाई गई  

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की समय-सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है। पहले 14 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन अब इसमें अतिरिक्त समय दिया गया है ताकि दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों का निपटारा ठीक से हो सके। अदालत ने माइक्रो-ऑब्जर्वर्स के आदेश पारित करने के अधिकार को स्पष्ट किया कि वे केवल निगरानी कर सकते हैं, फैसला लेने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के DGP से हलफनामा मांगा  

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया जाए। चुनाव आयोग ने आरोप लगाया था कि राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान धमकियां, हिंसा और बाधाएं पैदा की जा रही हैं।

ममता बनर्जी की याचिका और आरोप 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए दावा किया था कि 1.36 करोड़ से अधिक मतदाताओं की सूची में 'तार्किक विसंगति' (logical discrepancy) के आधार पर नाम हटाए जा सकते हैं, जैसे सरनेम की गलत स्पेलिंग या शादी के बाद पता बदलने जैसी सामान्य गलतियां। उन्होंने 8,300 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की तैनाती पर सवाल उठाए, इन्हें केंद्र सरकार के अधिकारी बताते हुए पक्षपात का आरोप लगाया। ममता बनर्जी 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बहस करने वाली पहली सेवारत मुख्यमंत्री बनी थीं।

एक याचिका में ममता की पेशी पर सवाल  

अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने याचिका दायर कर ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी को असंवैधानिक और गलत बताया है। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री को राज्य का प्रतिनिधित्व वकीलों के माध्यम से करना चाहिए, न कि व्यक्तिगत क्षमता में।