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सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, CJI ने की तीखी टिप्पणी: "क्या हम जातिविहीन समाज से ...

 
सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, CJI ने की तीखी टिप्पणी: "क्या हम जातिविहीन समाज से ...
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नई दिल्ली I यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 पर देशभर में बवाल मचा हुआ है। इन नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है, जिसके चलते यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन हो रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, जहां आज मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने इन नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है और स्पष्ट किया कि फिलहाल 2012 के पुराने UGC नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है, जबकि अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।

नए नियमों में क्या था?
UGC के इन नियमों में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में अनिवार्य रूप से Equity Center, Equity Squad और Equity Committee गठित करने का प्रावधान था। ये कमेटियां जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों की जांच करतीं। कमेटी में SC, ST, OBC, दिव्यांगजन और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य था। UGC का दावा था कि 2020 से 2025 के बीच पिछड़ी जातियों के खिलाफ शिकायतों में 100% से अधिक वृद्धि हुई है। नियमों में 24×7 हेल्पलाइन और गैर-अनुपालन पर फंड रोकने या मान्यता रद्द करने का प्रावधान भी था।

सवर्ण समाज की आपत्तियां

इन नियमों को लेकर सवर्ण वर्ग में यह आशंका जताई गई कि ये समाज में खाई पैदा करेंगे और दुरुपयोग की संभावना बढ़ाएंगे। याचिकाकर्ताओं (जिनमें एडवोकेट विष्णु शंकर जैन सहित अन्य शामिल हैं) ने सेक्शन 3(c) को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल आरक्षित वर्गों तक सीमित है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को सुरक्षा नहीं मिलती और रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन को बढ़ावा मिल सकता है।

CJI की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "एक देश के रूप में 75 साल बाद जाति-हीन समाज बनने की दिशा में जो कुछ भी हमने हासिल किया है, क्या हम वापस उधर ही लौट रहे हैं? क्या हम एक प्रतिगामी समाज बनते जा रहे हैं?" CJI ने नियमों की भाषा को अस्पष्ट (vague) और दुरुपयोग की संभावना वाला बताया। कोर्ट ने कहा कि यदि हस्तक्षेप नहीं किया गया तो समाज में खतरनाक विभाजन हो सकता है।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ?

CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। 

आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।

कोर्ट ने आगे कहा- नियमों की परिभाषा पूरी तरह अस्पष्ट है। इसका दुरुपयोग हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसमें संशोधन की सलाह दे सकते हैं। 

हम विश्वविद्यालयों में एक स्वतंत्र और समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक 3e प्रणाली कायम है, हमें कोई कारण नहीं दिखता... 3c प्रणाली प्रासंगिक कैसे हो सकती है? क्या यह अनावश्यक है?

UGC का पक्ष

UGC का कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा में समानता और पिछड़े वर्गों की सुरक्षा के लिए हैं, खासकर रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसे मामलों के बाद। हालांकि, विरोध के बीच अब ये नियम स्थगित हो गए हैं।