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दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, CJI बोले- 'उम्मीद है आप दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे'
 

 
 दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, CJI बोले- 'उम्मीद है आप दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे'
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 नवंबर) को गंभीर चिंता जताई। वायु प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा, "उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।" अदालत ने वाहनों से निकलने वाले धुएं, पराली जलाने और स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता जताई।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने स्थिति की भयावहता बताते हुए कहा कि प्रदूषित हवा में सांस लेना प्रतिदिन 30 सिगरेट पीने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण के कारण लोगों की आवाज तक प्रभावित हो रही है।

पराली जलाने से बढ़ रही प्रदूषण की समस्या

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत रही। अपराजिता सिंह ने कहा कि दिल्ली पहले से ही प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है और पराली जलाने से स्थिति और खराब हो जाती है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए किसानों को व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है। अदालत ने सुझाव दिया कि पराली की खरीद के दाम पहले से घोषित किए जाएं और ग्राम पंचायतों को इसके प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनें तथा व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसानों को फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता न पड़े।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर बढ़ते वाहनों और यातायात जाम को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया। मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली से गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद को जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों की भारी आवाजाही का उल्लेख किया।

पीठ ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल बयान देने और सुझावों तक सीमित रहने के बजाय तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर काम करना आवश्यक है।

दिवाली पर पाबंदियों के साथ जागरूकता भी जरूरी

दिवाली के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण पर चर्चा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

मुख्य न्यायाधीश ने त्योहारों को मनाने की पुरानी परंपराओं पर विचार करने की बात कही। वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने त्योहारों के बढ़ते व्यावसायीकरण को भी इस समस्या से जोड़कर देखा।

अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। गरीब और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग अक्सर प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। त्योहारों का समय उनकी आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

दिल्ली में AQI 400 के करीब, कई इलाकों में स्थिति गंभीर

शुक्रवार को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 391 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। हालांकि, कई इलाकों में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। रोहिणी में AQI 475 और आईआईटी दिल्ली क्षेत्र में 472 दर्ज किया गया।

अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से उठाए जा रहे कदमों की भी समीक्षा की। सुनवाई के दौरान स्कूलों को बंद करने या हाइब्रिड मोड में संचालित करने से जुड़ी मांग पर भी चर्चा हुई। पीठ ने कहा कि इस विषय में विशेषज्ञों की राय को महत्व दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 16 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय और दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं।