क्या फिर भड़का कावेरी जल विवाद? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तमिलनाडु, कर्नाटक के खिलाफ बड़ी याचिका
Cauvery Water Dispute: कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के निर्देशों के बावजूद तय हिस्से का पानी जारी नहीं किया। राज्य ने अदालत से कर्नाटक को आवश्यक जल छोड़ने के निर्देश देने की मांग की है।
तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?
तमिलनाडु का कहना है कि कावेरी जल बंटवारे को लेकर जारी आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। राज्य ने अदालत में दायर याचिका में कहा कि कर्नाटक को निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश दिया जाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिल सके।
CWMA के आदेश पर भी जताई नाराजगी
याचिका में तमिलनाडु ने यह भी कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आवंटित 4.536 टीएमसी (TMC) पानी राज्य की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। सरकार का दावा है कि मौजूदा आवंटन से खेती और विशेष रूप से कुरुवई फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
कर्नाटक पर तय हिस्से का पानी नहीं छोड़ने का आरोप
तमिलनाडु ने अदालत को बताया कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद निर्धारित मात्रा में पानी नहीं छोड़ा गया। राज्य का आरोप है कि इससे जल बंटवारे की व्यवस्था और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों की भावना प्रभावित हो रही है।
किसानों पर बढ़ रहा दबाव
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि पानी की कमी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। राज्य ने अदालत को बताया कि यदि समय पर पानी नहीं मिला तो खेती प्रभावित होगी और हजारों किसानों की आजीविका संकट में आ सकती है। इसी मुद्दे को लेकर राज्य में किसान संगठन भी लगातार आवाज उठा रहे हैं।
कर्नाटक का क्या है पक्ष?
दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार का कहना है कि वह जलाशयों की स्थिति और वर्षा के आधार पर निर्णय ले रही है। हाल के दिनों में राज्य ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी कानूनी विकल्प खुले रखे हुए है। राज्य का तर्क है कि उपलब्ध जल संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
पुराना है कावेरी जल विवाद
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। इस मामले में पहले भी कई बार सुप्रीम कोर्ट, कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के स्तर पर सुनवाई और आदेश जारी हो चुके हैं। अब एक बार फिर यह विवाद सर्वोच्च अदालत के सामने पहुंच गया है, जहां अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
