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Tata Sons नहीं होगी लिस्टेड? Tata Trusts ने बनाया नया प्लान, 2 बड़ी कंपनियों के विलय का प्रस्ताव

 
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नई दिल्ली: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को लेकर एक बड़ा कारोबारी बदलाव प्रस्तावित किया गया है। Tata Trusts ने Tata Sons में Tata Electronics Systems Solutions (TESS) और Tata Consulting Engineers (TCE) के विलय का प्रस्ताव रखा है। इस पुनर्गठन के जरिए Tata Sons को RBI के NBFC और Core Investment Company (CIC) नियमों के दायरे से बाहर लाने की कोशिश की जाएगी। इसका एक अहम मकसद कंपनी को अनिवार्य लिस्टिंग से बचाकर निजी कंपनी के तौर पर बनाए रखना भी है।

Tata Trusts ने Tata Sons को भेजा प्रस्ताव

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। Trusts ने Tata Sons के बोर्ड को प्रस्ताव भेजकर TESS और TCE के विलय पर विचार करने और जरूरी प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। प्रस्ताव के तहत RBI से भी आवश्यक मंजूरी और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिया जाएगा।

Tata Trusts का कहना है कि इस पुनर्गठन के बाद Tata Sons की आय का बड़ा हिस्सा उसके ऑपरेटिंग कारोबार से आएगा। इससे कंपनी की नियामकीय स्थिति बदल सकती है और वह NBFC या CIC के रूप में वर्गीकृत नहीं होगी।

1.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑपरेटिंग रेवेन्यू

31 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, प्रस्तावित विलय के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 1,05,043 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह कुल आय का करीब 64.3 फीसदी होगा। वहीं वित्तीय परिसंपत्तियों से आय करीब 40,072 करोड़ रुपये बताई गई है।

Tata Trusts के मुताबिक, ऑपरेटिंग कारोबार से होने वाली आय का हिस्सा बढ़ने के कारण कंपनी NBFC के लिए लागू ‘Principal Business Criteria’ को पूरा नहीं करेगी। इसी आधार पर Tata Sons को NBFC वर्गीकरण से बाहर लाने का रास्ता तैयार हो सकता है।

CIC का दर्जा भी खत्म हो सकता है

प्रस्तावित पुनर्गठन का असर सिर्फ NBFC वर्गीकरण पर ही नहीं पड़ेगा। Tata Trusts के अनुसार, विलय के बाद कंपनी की कुल नेट एसेट करीब 2,00,158 करोड़ रुपये होगी। इसमें ग्रुप कंपनियों में निवेश लगभग 1,77,120 करोड़ रुपये होगा।

यह निवेश कुल नेट एसेट के 90 फीसदी की सीमा से नीचे रहेगा। ऐसे में कंपनी के Core Investment Company (CIC) के रूप में वर्गीकृत होने की शर्त भी पूरी नहीं होगी।

RBI से लेनी होगी मंजूरी

हालांकि यह बदलाव सीधे तौर पर लागू नहीं होगा। प्रस्तावित विलय के लिए RBI की मंजूरी जरूरी होगी। Tata Trusts के मुताबिक, प्रक्रिया RBI के Non-Banking Financial Companies—Voluntary Amalgamation Directions, 2025 के तहत पूरी की जाएगी और केंद्रीय बैंक से पहले नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा।

पुनर्गठन पूरा होने और Tata Sons के CIC के रूप में बाहर आने के बाद कंपनी को अपना RBI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी सरेंडर करना होगा।

Tata Sons की लिस्टिंग से कैसे जुड़ा है मामला?

इस पूरे प्रस्ताव का एक अहम पहलू Tata Sons की संभावित लिस्टिंग है। RBI के स्केल-बेस्ड रेगुलेशन के तहत बड़े NBFC को ‘Upper Layer’ में आने पर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ सकता है। Tata Sons लंबे समय से निजी कंपनी के तौर पर बने रहने की कोशिश करती रही है।

Tata Trusts ने कहा है कि प्रस्तावित ढांचा नियामकीय नियमों के अनुरूप रहते हुए Tata Group की 100 साल से ज्यादा पुरानी संगठनात्मक संरचना को बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव जुलाई 2025 में Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust की उन resolutions के अनुरूप भी बताया गया है, जिनमें Tata Sons को unlisted private company बनाए रखने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई थी।

Tata Sons में फिर लौटेगा ऑपरेटिंग मॉडल

Tata Trusts के सलाहकार Farokh N. Subedar के मुताबिक, प्रस्तावित पुनर्गठन से Tata Sons अपने पुराने मॉडल की ओर लौट सकती है, जिसमें वह खुद ऑपरेटिंग कारोबार चलाएगी और उससे राजस्व अर्जित करेगी। साथ ही कंपनी Tata Group की होल्डिंग कंपनी की भूमिका भी निभाती रहेगी।

यानी प्रस्ताव का मकसद सिर्फ नियामकीय स्थिति बदलना नहीं है, बल्कि Tata Sons को एक ऐसी संरचना देना है जिसमें वह ऑपरेटिंग कारोबार और होल्डिंग कंपनी—दोनों भूमिकाएं निभा सके।