Teachers' Day 2026: PM मोदी ने शिक्षकों से की बातचीत, बोले- किताबों और सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में उतरना होगा
Teachers' Day 2026: शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के विजेताओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण, उनकी प्रतिभा पहचानने, बढ़ते स्क्रीन टाइम और रचनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा की। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई खास प्रतिभा होती है और उसे पहचानना शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
‘हर बच्चे में कोई न कोई ताकत होती है’
शिक्षकों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हो सकता है कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा न हो, लेकिन परमात्मा ने हर व्यक्ति को कोई न कोई ताकत दी है। उन्होंने शिक्षकों से सवाल किया कि क्या वे बच्चों के भीतर छिपे टैलेंट को पहचानने की कोशिश करते हैं।
इस पर शिक्षकों ने बताया कि वे इस दिशा में लगातार प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कक्षा में मौजूद हर बच्चे की अलग खूबी, अलग प्रतिभा और अलग चुनौती होती है। शिक्षक के तौर पर उनकी कोशिश रहती है कि बच्चों की इन क्षमताओं को पहचाना जाए और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिले।
ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता पर भी हुई चर्चा
संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने बताया कि उनका शोध ब्रेस्ट कैंसर विषय पर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर जैसे विषय पर बात करने में हिचकिचाती हैं। ऐसे में उनका प्रयास है कि महिलाएं कम से कम शुरुआती स्तर पर यह पहचान सकें कि उन्हें डॉक्टर की सलाह की जरूरत है।
शिक्षिका ने बताया कि वे ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े मुद्दों और हाइजीन को लेकर काम कर रही हैं।
इस पर पीएम मोदी ने अपने काशी से जुड़े अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी के सांसद के तौर पर उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता को लेकर एक अभियान चलाया था। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अब महिलाएं खुद सामने आकर अपनी जांच करा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक दिन में अधिकतम लोगों की जांच से जुड़ा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया।
‘स्क्रीन टाइम एक तरह का एडिक्शन बन गया है’
बातचीत में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम का मुद्दा भी उठा। पीएम मोदी ने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक तरह का एडिक्शन बन गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों की रुचि खेलकूद और मैदान में खेलने की तरफ बढ़ाई जाए, ताकि वे धीरे-धीरे स्क्रीन से बाहर निकल सकें।
पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को ज्यादा से ज्यादा क्रिएटिविटी से जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए स्कूलों में ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जो बच्चों के लिए धीरे-धीरे उनकी आदत का हिस्सा बन जाएं।
‘किताबों और सिलेबस से बाहर निकलना होगा’
शिक्षकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा जगत को अब पहले से कहीं ज्यादा किताबों और सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में उतरना होगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन को केवल पढ़ाई और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उनके मुताबिक, बच्चों के भीतर मौजूद जिज्ञासा, रचनात्मकता और बचपन को बनाए रखना भी जरूरी है।
‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’
पीएम मोदी ने कहा कि “बचपन मरने नहीं देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बनाए रखने में शिक्षक की बड़ी भूमिका होती है। इसके लिए शिक्षक के भीतर भी बचपन की सहजता और रचनात्मकता बनी रहनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अंत में नेशनल टीचर्स अवॉर्ड विजेताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
