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एआई बूम से बढ़ेगी बिजली की मांग, डाटा सेंटर सेक्टर में भारत को बड़ा मौका

 
एआई बूम से बढ़ेगी बिजली की मांग, डाटा सेंटर सेक्टर में भारत को बड़ा मौका
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नई दिल्ली। अगर भारत बिजली आपूर्ति और ग्रिड से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर लेता है तो वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख डाटा सेंटर हब बन सकता है। यह बात डेलाइट दक्षिण एशिया के चीफ ग्रोथ ऑफिसर देबाशीष मिश्रा ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में पेश की गई एक रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कही।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक डेटा खपत में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है, जबकि दुनिया के पांच प्रतिशत से भी कम डाटा सेंटर भारत में स्थित हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। मिश्रा ने कहा कि कम निर्माण लागत, प्रतिस्पर्धी बिजली दरें और बड़ी एआई-स्किल्ड वर्कफोर्स जैसे बुनियादी लाभ भारत को बढ़त दिला सकते हैं। साथ ही, सरकार की नीतिगत पहल भी इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं। बजट में यह घोषणा की गई है कि भारत से वैश्विक स्तर पर क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स से छूट मिलेगी।

2030 तक 800 अरब डॉलर निवेश का अनुमान

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2030 तक डाटा सेंटर क्षेत्र में करीब 800 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। इससे वैश्विक क्षमता में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी और यह उत्तरी अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। भारत को इस संभावित वृद्धि का बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

मिश्रा के अनुसार, भारत की डाटा सेंटर क्षमता 2025 में लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 8 से 10 गीगावाट तक पहुंच सकती है। एआई आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ बिजली की मांग में भी तेजी से बढ़ोतरी होगी।

बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सबसे बड़ी जरूरत

एआई से जुड़े डाटा सेंटरों के लिए 2030 तक अतिरिक्त 40 से 45 टेरावाट घंटे बिजली की आवश्यकता होगी, जबकि 2024 में यह मांग 10 से 15 टेरावाट घंटे के बीच थी। इससे देश की कुल बिजली खपत में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 से 3 प्रतिशत तक हो सकती है।

डाटा सेंटरों को न्यूनतम ट्रांसमिशन लॉस के साथ 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की जरूरत होती है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के नियमों और नीतियों में भिन्नता के कारण कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख डाटा सेंटर हब में 2030 तक 2 से 3 गीगावाट की अतिरिक्त पीक डिमांड देखी जा सकती है। यह उनके मौजूदा पीक लोड का 5 से 20 प्रतिशत तक हो सकता है, जिससे राज्य ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।