NEET-PG 2025 कटऑफ घटाने का केंद्र ने किया बचाव, सुप्रीम कोर्ट में कहा—MBBS पास डॉक्टरों की योग्यता पर नहीं पड़ेगा असर
नई दिल्ली। NEET-PG 2025 के क्वालीफाइंग कटऑफ में कमी के फैसले को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। केंद्र ने कहा है कि कटऑफ घटाने से डॉक्टरों की योग्यता या मरीजों की सुरक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि सभी उम्मीदवार पहले से ही MBBS की डिग्री हासिल कर न्यूनतम योग्यता मानकों को पूरा कर चुके होते हैं।
दरअसल, 2025-26 सत्र के लिए काउंसलिंग के तीसरे दौर में क्वालीफाइंग प्रतिशत को कम किया गया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में माइनस अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी पीजी सीट आवंटित किए जाने के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई जारी है।
क्या है केंद्र का तर्क?
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि NEET-PG परीक्षा का उद्देश्य डॉक्टरों की न्यूनतम योग्यता की जांच करना नहीं है। यह योग्यता पहले ही MBBS डिग्री से प्रमाणित हो जाती है। NEET-PG केवल सीमित पोस्टग्रेजुएट सीटों के लिए उम्मीदवारों के बीच मेरिट लिस्ट तैयार करने की एक फिल्टर व्यवस्था है।
सरकार के अनुसार, कटऑफ में कमी एक प्रशासनिक निर्णय है, जिसका मकसद खाली सीटों को भरना है। इससे मेरिट आधारित सीट आवंटन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती। सीटें अब भी उम्मीदवारों की रैंक और उनकी पसंद के आधार पर ही दी जाती हैं।
केंद्र ने यह भी बताया कि 2017 में NEET-PG शुरू होने के बाद से कई बार क्वालीफाइंग कटऑफ कम किया गया है। वर्ष 2023 में कुछ श्रेणियों में कटऑफ शून्य प्रतिशत तक भी पहुंच गया था।
मरीजों की सुरक्षा पर क्या कहा?
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र ने स्पष्ट किया कि सभी चयनित अभ्यर्थी पहले से लाइसेंस प्राप्त MBBS डॉक्टर हैं और स्वतंत्र रूप से चिकित्सा अभ्यास करने के पात्र हैं। पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण के दौरान वे वरिष्ठ फैकल्टी और विशेषज्ञों की सख्त निगरानी में कार्य करते हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है।
