उत्तराखंड से दिल्ली-NCR तक भूंकप के तेज झटके से कांपी धरती, 4.9 रही तीव्रता, घरों से बाहर निकले लोग
उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-NCR तक मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। उत्तराखंड के गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में लोगों ने धरती में कंपन महसूस किया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन से करीब 13 किलोमीटर की गहराई में था।
भूकंप रात करीब 10:24 बजे आया। इसके झटके बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ समेत कई इलाकों में महसूस किए गए। भूकंप के झटके महसूस होते ही कई जगह लोग घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।
क्यों आता है भूकंप?
धरती की ऊपरी परत कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार धीरे-धीरे खिसकती और एक-दूसरे से टकराती रहती हैं। जहां इन प्लेटों के बीच ज्यादा हलचल होती है, वहां फॉल्ट लाइन बन सकती है।
प्लेटों के लगातार खिसकने और टकराने से चट्टानों पर दबाव बढ़ता रहता है। जब यह दबाव एक सीमा से ज्यादा हो जाता है तो चट्टानों में अचानक टूट-फूट या खिसकाव होता है। इसी दौरान धरती के भीतर जमा ऊर्जा तेजी से बाहर निकलती है और भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं। इन्हीं तरंगों के कारण जमीन हिलने लगती है और भूकंप महसूस होता है।
क्या होता है भूकंप का केंद्र?
भूकंप के दौरान धरती के अंदर जिस स्थान से भूकंपीय ऊर्जा निकलती है, उसे हाइपोसेंटर या भूकंप का उद्गम केंद्र कहा जाता है। इसके ठीक ऊपर धरती की सतह पर स्थित स्थान को एपिसेंटर कहा जाता है। आमतौर पर एपिसेंटर के आसपास भूकंप के झटके ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
भूकंप की तीव्रता और उसका प्रभाव कई चीजों पर निर्भर करता है। इसमें भूकंप की गहराई, ऊर्जा, जमीन की संरचना और भूकंपीय तरंगों की प्रकृति अहम भूमिका निभाती है। भूकंप जितना शक्तिशाली होगा, उसका प्रभाव उतने बड़े क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है। हालांकि, केवल रिक्टर स्केल की संख्या के आधार पर नुकसान का अनुमान लगाना सही नहीं होता।
