Movie prime

ई-आरसीटी सिस्टम से रेल मुआवजा प्रक्रिया होगी पूरी तरह ऑनलाइन, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए आई ‘रेल टेक पॉलिसी’

 
नई दिल्ली। रेल यात्रियों के लिए मुआवजा पाना अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रहा है। रेल हादसे, चोट, मृत्यु या सामान के नुकसान की स्थिति में अब
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली। रेल यात्रियों के लिए मुआवजा पाना अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रहा है। रेल हादसे, चोट, मृत्यु या सामान के नुकसान की स्थिति में अब यात्रियों को रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (आरसीटी) की बेंच के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्ते-52 सुधार अभियान के तहत ई-आरसीटी सिस्टम लागू करने की घोषणा की है, जिसके माध्यम से देशभर की सभी 23 आरसीटी बेंच को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

ई-आरसीटी प्रणाली के तहत यात्री या उनके परिजन घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से कभी भी क्लेम दायर कर सकेंगे। आवश्यक दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे और हर अपडेट की जानकारी एसएमएस और ई-मेल के जरिए दी जाएगी। इससे सुनवाई की तारीख जानने, दस्तावेज जमा करने और आदेश की प्रति लेने के लिए ट्रिब्यूनल जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

नई व्यवस्था में आरसीटी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाएगा। अब तक अक्सर यह समस्या आती थी कि दुर्घटना एक राज्य में होती थी और यात्री दूसरे राज्य का होता था, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि मामला किस बेंच में दायर किया जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म से यह समस्या खत्म होगी और केस की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने की सुविधा भी मिलेगी, जिससे यात्रा और वकील पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।

ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम से तेजी

रेल मंत्री के अनुसार ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम के जरिए मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। फाइल गुम होने या अनावश्यक देरी की समस्या कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। आदेश और फैसले भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

स्टार्टअप्स के लिए ‘रेल टेक पॉलिसी’

सरकार ने दूसरा बड़ा कदम ‘रेल टेक पॉलिसी’ के रूप में उठाया है। इसके तहत कोई भी स्टार्टअप, शोध संस्थान या उद्योग रेलवे से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अपना तकनीकी समाधान प्रस्तावित कर सकता है। पहले रेलवे खुद समस्याएं तय करता था और उन्हीं पर समाधान आमंत्रित किए जाते थे, लेकिन अब सुरक्षा, रखरखाव, यात्री सुविधा या संचालन से जुड़े किसी भी क्षेत्र में नवाचार के सुझाव दिए जा सकेंगे।

प्राप्त प्रस्तावों की उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच संबंधित विभाग करेगा। मंजूरी मिलने पर पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा और सफल होने पर उसे लागू किया जाएगा। इसके लिए अलग बजट निर्धारित नहीं होगा, बल्कि संबंधित विभाग के बजट से ही खर्च किया जाएगा।

नई नीति के तहत एआई आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली, कोच में आग का तुरंत पता लगाने वाली तकनीक, ड्रोन से टूटी पटरी की जांच और रेल ट्रैक पर तनाव की निगरानी जैसे तकनीकी समाधान को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे रेल हादसों में कमी आने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।